UPI से लेन देन करना क्या होगा अब महंगा? सरकार ने MDR शुल्क वसूलने के लिए पास किया बिल, जानिए इसके पीछे की सच्चाई
UPI अपनी आसान और सुरक्षित टेक्नोलॉजी के कारण देश ही नहीं दुनिया के लिए एक मॉडल बन गया है। हालांकि अब सरकार इस पर MDR शुल्क लगाने की योजना बना रही है।
- टेक्नोलॉजी न्यूज
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UPI अपनी आसान और सुरक्षित टेक्नोलॉजी के कारण देश ही नहीं दुनिया के लिए एक मॉडल बन गया है। इसी कारण भारत सबसे ज्यादा डिजिटल पेमेंट वाला देश भी बना हुआ है। लेकिन UPI की बड़ी सफलता के पीछे कारण इसका फ्री होना भी है। हालांकि अब सरकार इस पर MDR शुल्क लगाने की योजना बना रही है।
क्या होता है MDR शुल्क
एमडीआर का मतलब होता है मर्चेंट डिस्काउंट रेट। यह शुल्क डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए व्यापारियों द्वारा बैंकों या पेमेंट ऐप को दिया जाता है। लेकिन भारत सरकार ने 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR शुल्क को शून्य कर दिया था। इस कारण UPI इस्तेमाल करने पर ग्राहकों और व्यापारियों दोनों को इस शुल्क से राहत मिलती रही। इस कारण UPI 5G की स्पीड में इस्तेमाल होने लगा और अब भारत के अधिकतर लोग बिना कैश के ही सारा बाजार खरीद लेते हैं।
संसद में पारित हुआ विधेयक
अब हाल ही में लोकसभा में टैक्सेशन एवं अन्य कानून (संशोधन) 2026 पारित हुआ है। इससे सरकार भविष्य में UPI पर MDR शुल्क वसूल सकती है।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
हालांकि भारत सरकार ने यह साफ किया है कि आम ग्राहकों पर इस संशोधित बिल का कोई असर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपनी एक्स पोस्ट पर यह साफ कहा है कि UPI ग्राहकों से MDR शुल्क नहीं वसूला जाएगा और वर्तमान की तरह भविष्य में भी UPI ग्राहकों के लिए फ्री उपलब्ध रहेगा।
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फिर किस पर पड़ेगा असर
संसद द्वारा पारित टैक्सेशन एवं अन्य कानून (संशोधन) 2026 के सरकार बड़े मर्चेंट्स या विशिष्ट बड़े लेन-देन पर करने वाले लोगों से एमडीआर शुल्क अब वसूल सकेगी। इस बिल में यह भी साफ किया है कि छोटे दुकानदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्यों लगाया शुल्क
इस बदलाव के पीछे बढ़ते डिजिटल ट्रांजैक्शन के बीच सर्वर क्षमता, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे को मजबूत करने को लेकर बताया जा रहा है।