अपडेटेड 26 January 2026 at 21:35 IST
इस नए AI मॉडल ने कर दिया कमाल! अब सिर्फ WhatsApp वॉइस नोट से लगेगा डिप्रेशन का पता, जानें ये नया फीचर
अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी के भी WhatsApp पर भेजे गए ऑडियो रिकॉर्डिंग से उसके मेंटल स्टेट की पहचान कर सकता है। यह AI मॉडल महिलाओं में डिप्रेशन की पहचान ज्यादा सटीकता से करता है।
- टेक्नोलॉजी न्यूज
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Voice Note Depression Detection: दिन-ब-दिन AI मॉड्यूल में नए-नए बदलाव हो रहे हैं। अब AI के नए फीचर के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी के भी WhatsApp पर भेजे गए ऑडियो रिकॉर्डिंग से उसके मेंटल स्टेट की पहचान कर सकता है। दरअसल, साइंटिस्ट ने एक ऐसा एआई मॉडल तैयार किया है, जो आपके डिप्रेशन और मेंटल स्टेट का पता लगा सकता है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग से डिप्रेशन के लक्षण का पता
दरअसल, कुछ दिन पहले ‘PLOS Mental Health’ नाम के एक जर्नल में एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी। जिसमें बताया गया कि अब AI ऑडियो रिकॉर्डिंग्स के आधार पर इंसान की मानसिक स्थिति का पता लगा सकता है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी हद तक सटीक नतीजे भी देता है। खास बात है कि इसके लिए किसी लंबी टेस्ट प्रक्रिया या सवाल-जवाब की जरूरत नहीं होती, बल्कि सिर्फ एक सामान्य वॉइस रिकॉर्डिंग ही काफी है।
महिलाओं के मामले में अधिक सटीक
बता दें, यह रिसर्च ब्राजील के रिसर्चर विक्टर एच. ओ. ओटानी के नेतृत्व में हुई, जिसमें सामने आया कि यह AI मॉडल महिलाओं में डिप्रेशन की पहचान लगभग 92 प्रतिशत ज्यादा सटीकता से करता है। वहीं, पुरूषों के मामले में इसकी सटीकता करीब 75 प्रतिशत है।
कैसे करता है डिप्रेशन की पहचान?
दरअसल, एआई मॉडल डिप्रेशन का पता लगाने के लिए एक आम ऑडियो रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करता है, जिसमें व्यक्ति अपने डेली रूटीन के बारे में बात करता है। डिप्रेशन के कारण बोलने की स्पीड, पिच और एनर्जी में बदलाव होता है, जिसे एआई आसानी से पकड़ लेता है। दरअसल, ये बदलाव इंसानी कानों को तुरंत महसूस नहीं होते, लेकिन AI एल्गोरिदम इसकी जांच कर लेता है और इन्हीं पैटर्न्स को पहचानकर संभावित मानसिक तनाव की ओर इशारा करता है। इस तरह, बस एक छोटी सी ऑडियो क्लिप से एआई डिप्रेशन का पता लगा सकता है।
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क्या ले सकता है डॉक्टरों की जगह?
इस एआई टेक्नोलॉजी से डिप्रेशन का पता लगाना सस्ता और आसान हो सकता है, खासकर जहां मनोवैज्ञानिकों की कमी है या इलाज महंगा है। यह शुरुआती जांच में मदद कर सकती है, जिससे समय पर इलाज मिल सके। हालांकि इसके रिसर्चर्स साफ तौर पर कहते हैं कि यह डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकती, लेकिन एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बन सकती है, जो शुरुआती जांच में मदद करेगी। इसकी खासियत है कि इसमें व्यक्ति को असहज सवालों का सामना नहीं करना पड़ता, बस एक सामान्य वॉइस नोट से काम हो जाता है।
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Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 26 January 2026 at 21:35 IST