अपडेटेड 8 January 2026 at 14:34 IST

अंतरिक्ष स्टेशन में आई Medical emergency, NASA ने 8 जनवरी को होने वाली स्पेसवॉक को किया स्थगित

NASA Postpones Spacewalk : नासा ने 8 जनवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर होने वाली स्पेसवॉक को एक क्रू सदस्य की स्वास्थ्य समस्या के कारण स्थगित कर दिया। नासा जल्द ही नई तारीख और आगे के अपडेट बाद में देगा। जानें क्या होता स्पेसवॉक?

NASA Postpones First Spacewalk Of 2026 Amidst Astronaut Medical Emergency
अंतरिक्ष स्टेशन में आई Medical emergency | Image: X

NASA Spacewalk Postponed 2026 : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने 8 जनवरी, 2026 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के बाहर होने वाली Spacewalk को स्थगित कर दिया है। यह फैसला एक क्रू मेंबर की स्वास्थ्य समस्या के कारण लिया गया है।

NASA के अनुसार, बुधवार दोपहर को अंतरिक्ष स्टेशन पर एक क्रू सदस्य को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गोपनीयता के कारण नासा ने क्रू सदस्य का नाम या समस्या की ज्यादा जानकारी नहीं दी है। एजेंसी ने बताया कि स्थिति स्थिर है और कोई खतरा नहीं है।

रखरखाव का होना था काम

यह स्पेसवॉक ISS के बाहर कुछ रखरखाव और अपग्रेड का काम करने के लिए होने थी। अब नासा नई तारीख की घोषणा बाद में करेगा। NASA ने क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, इसलिए ऐसा फैसला लिया गया। अंतरिक्ष मिशनों में ऐसी स्थितियां कभी-कभी आ जाती हैं और नासा हमेशा सतर्क रहता है। जल्द ही और अपडेट आने की उम्मीद है।

क्या होती है स्पेसवॉक?

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक, जब भी कोई एस्ट्रॉनॉट अंतरिक्ष में किसी यान से बाहर निकलता है, तो उसे स्पेसवॉक कहा जाता है। स्पेसवॉक को तकनीकी रूस से एक्स्ट्राव्हीक्यूलर एक्टिविटी (EVA) भी कहा जाता है। पहला स्पेसवॉक 18 मार्च 1965 में हुआ था जो कि 10 मिनट लंबा था। स्पेसवॉक करने वाले पहले व्यक्ति रूस के एलेक्सी लियोनोव थे। इसके अलावा स्पेसवॉक करने वाले पहले अमेरिकी व्यक्ति एड व्हाइट थे, जिन्होंने 3 जून 1965 को जेमिनी 4 मिशन के दौरान अंतरिक्ष पर चहलकदमी की थी। एड व्हाइट का स्पेसवॉक 23 मिनट का था। 

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एस्टॉनॉट क्यों करते हैं स्पेस वॉक?

नासा के अनुसार, एस्ट्र्रॉनाट्स अंतरिक्ष में रहते हुए अपने यान के बाहर काम कर सकते हैं। ऐसे में स्पेसवॉक के समय एस्ट्र्रॉनाट्स विज्ञान का प्रयोग करते हैं जिसके तहत वह नए उपकरणों का परीक्षण करते हैं। इसके अलावा वह अंतरिक्ष यान की मरम्मत करने के लिए भी यान के बाहर आते हैं। स्पेसवॉक के लिए अंतरिक्ष यात्री स्पेस सूट पहनकर निकलते हैं जिससे की उन्हें सांस लेने में तकलीफ न हो। 

स्पेसवॉक करना कितना मुश्किल?

स्पेसवॉक पर जाने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों को घंटों पहले स्पेससूट पहनना होता है। ये स्पेससूट ऑक्सीजन से भरे होते हैं। इसे पहनने के बाद वह ऑक्सीजन में सांस लेते हैं जिससे की उनके शरीर में मौजूद नाइट्रोजन बाहर निकल जाए। अगर शरीर से नाइट्रोजन बाहर नहीं आता तो ये उनके लिए भारी पड़ सकता है। अंतरिक्ष में चलते वक्त एस्ट्र्रॉनाट्स के शरीर में गैस के बुलबुल बन सकते हैं। इस वजह से एस्ट्र्रॉनाट्स को कोहनी, कंधों, कलाई और घुटनों में दर्द हो सकता है। बता दें कि इस दर्द को बेंड्स कहा जाता है।

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स्पेसवॉक के वक्त सेफ्टी का रखा जाता है ख्याल

स्पेसवॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्री सेफ्टी टेदर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे कि वह अपने यान के करीब रह सकें। टेदर रस्सियों की तरह होते हैं जिसका एक छोर एस्ट्रॉनॉट के स्पेससूट से तो दूसरा यान से जुड़ा होता है। इसके अलावा स्पेसवॉक के दौरान उनके सुरक्षित रहने का एक और तरीका सेफर पहनना है। इसे बैकपैक की तरह पहना जाता है।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 8 January 2026 at 14:27 IST