10 Years of UPI: दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बना UPI, 10 साल में रॉकेट की रफ्तार से बढ़ा डिजिटल ट्रांजैक्शन
10 Years of UPI: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को शुरू हुए 10 साल पूरे हो गए हैं। आज से 10 साल पहले 25 अगस्त 2016 को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने UPI को लॉन्च किया था। बस यही से भारत में डिजिटल पेमेंट का नया अध्याय शुरू हो गया।
- टेक्नोलॉजी न्यूज
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10 Years of UPI: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को शुरू हुए 10 साल पूरे हो गए हैं। आज से 10 साल पहले 11 अप्रैल 2016 को UPI को तैयार किया गया था। फिर 25 अगस्त 2016 को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने UPI को लॉन्च किया था। बस यही से भारत में डिजिटल पेमेंट का नया अध्याय शुरू हो गया। शुरू में विपक्षी पार्टियां UPI का मजाक बनाती थी लेकिन बाद में UPI का लोहा ना सिर्फ देश ने बल्कि पूरी दुनिया ने माना।
डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बना
UPI भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ और वित्तीय समावेशन (financial inclusion) का एक अहम जरिया बनकर उभरा है। एक दशक से ज़्यादा समय में, UPI ने ज़बरदस्त विस्तार और तेज़ी दिखाई है।
एक UPI और ढेरों ऐप्स
UPI पर जहां एक ओर भारत सरकार की अपनी BHIM ऐप बनाई गई तो वहीं दूसरी ओर पेटीएम, फोनपे और गूगल पे जैसी निजी डिजिटल पेमेंट ऐप्स भी UPI पर आधारित होकर अपग्रेड हो गई।
डिजिटल ट्रांज़ैक्शन ने पकड़ी रॉकेट की रफ्तार
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2016-17 में डिजिटल ट्रांज़ैक्शन की संख्या सालाना सिर्फ़ 1.78 करोड़ थी बल्कि आज वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 24,162 करोड़ से ज़्यादा हो गई है। इससे ट्रांज़ैक्शन की संख्या में लगभग 13,000 गुना की बहुत बढ़ी बढ़ोतरी आई है।
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ट्रांज़ैक्शन की संख्या के साथ ट्रांज़ैक्शन की वैल्यू में भी बड़ा उछाल आया है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां डिजिटल ट्रांज़ैक्शन की वैल्यू मात्र ₹0.07 लाख करोड़ थी लेकिन आज वो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग ₹314 लाख करोड़ हो गई है। इससे भारत की डिजिटल ट्रांज़ैक्शन वैल्यू में 4,000 गुना से ज़्यादा की महा बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
भारत में लेन-देन के तरीके को बदला
UPI भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के सबसे सफल स्तंभों में से एक बनकर उभरा है। यह एक ऐसा इंटरऑपरेबल, रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म देता है जो एक ही ऐप के ज़रिए आसानी से पीयर-टू-पीयर (एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति) और पीयर-टू-मर्चेंट (व्यक्ति से व्यापारी) ट्रांज़ैक्शन की सुविधा देता है। आज, यह लाखों यूज़र्स के लिए पेमेंट का पसंदीदा ज़रिया है और इसने भारत में लेन-देन के तरीके को बदल दिया है। UPI ने देश भर के लोगों और समुदायों को सशक्त बनाया है और साथ ही व्यापक आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ावा देने का काम किया है।
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दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बना
ट्रांज़ैक्शन की संख्या और वैल्यू में एक साथ बढ़ोतरी, बार-बार होने वाले रिटेल पेमेंट में UPI की बढ़ती भूमिका को दिखाती है। UPI ने जो अभूतपूर्व स्तर, विश्वसनीयता और इंटरऑपरेबिलिटी हासिल की है, उसे दुनिया भर में पहचान मिली है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने इसे ट्रांज़ैक्शन की संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम माना है, जो स्केलेबल, समावेशी और इनोवेटिव डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में भारत की लीडरशिप को रेखांकित करता है।
डिजिटल भुगतान में सबसे निर्णायक फैसला- पीएम मोदी
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा है कि एक दशक पहले यूपीआई की शुरुआत हुई थी और यह भारत की डिजिटल भुगतान यात्रा में अब तक का सबसे निर्णायक फैसला साबित हुआ है। उन्होंने यूपीआई के व्यापक पैमाने और पहुंच पर गर्व करने की बात कही। पीएम मोदी ने देशवासियों से यूपीआई के साथ अपने अनुभव साझा करने की अपील की। उन्होंने लोगों से यह बताने को कहा कि यूपीआई के आने से उनके जीवन में किस तरह का बदलाव आया है और डिजिटल भुगतान ने रोजमर्रा के लेनदेन को कितना आसान बनाया है।
11 देशों में पहुंचा UPI
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि यूपीआई अब दुनिया के 11 देशों में ऑपरेशनल है। इनमें फ्रांस, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ग्रीस और मॉरिशस शामिल हैं। पोस्ट में कहा गया कि भारत में आसान भुगतान की सुविधा देने से लेकर सीमाओं के पार डिजिटल लेन-देन संभव बनाने तक, यूपीआई भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को दुनिया भर में पहुंचा रहा है।