आत्मा परिजनों को देखती रहती है...मृत्यु के बाद शव को रातभर अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता? गरुड़ पुराण में लिखा है पूरा सच, जानिए

सनातन धर्म में मृत्यु के बाद कई ऐसे नियम और परंपराएं बताई गई हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य माना जाता है। इनमें से एक मुख्य नियम है कि मृत्यु के बाद शव को रातभर अकेला न छोड़ना। गरुड़ पुराण के अनुसार, इसके पीछे कई कारण छिपे हैं। आइए गरुड़ पुराण में जानते हैं।

Why died body not left alone overnight after death know in garuda purana reason in detail
Why died body not left alone overnight after death know in garuda purana reason in detail | Image: Meta AI

सनातन धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिसमें अंतिम संस्कार को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू धर्मग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की स्थितियों का बेहद सूक्ष्म और तार्किक वर्णन मिलता है। अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों से सुना होगा कि रात के समय शव को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उसके पास कोई न कोई अवश्य बैठा रहना चाहिए और दीपक जलते रहना चाहिए।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है? इसके पीछे सिर्फ कोई परंपरा नहीं, बल्कि इसके गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं। आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार इसके पीछे का पूरा सच।

भटकती आत्मा और परिजनों का मोह

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के प्राण निकलते हैं, तो आत्मा तुरंत ही यमलोक की यात्रा पर नहीं निकल जाती। वह कुछ समय के लिए अपने परिजनों के बीच ही रहती है। वह अपने मृत शरीर और रोते-बिलखते परिजनों को देखती रहती है। मोह के कारण आत्मा पुनः उस शरीर में प्रवेश करने का प्रयास करती है। यदि शव को अकेला छोड़ दिया जाए, तो वह छटपटाहट में कुछ ऐसी ऊर्जाएं आकर्षित कर सकती है जो सही नहीं हैं। इसलिए, परिजनों की उपस्थिति आत्मा को एक शांति देती है कि उसका अंतिम संस्कार विधि-विधान से किया जा रहा है।

आसुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा 

रात के समय को नकारात्मक शक्तियों का काल माना जाता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत शरीर के आसपास नकारात्मक ऊर्जाएं बहुत जल्दी आकर्षित होती हैं। यदि शव को अकेला छोड़ दिया जाए, तो तांत्रिक क्रियाएं करने वाले या बुरी शक्तियां उस मृत शरीर पर अधिकार कर सकती हैं या उसका दुरुपयोग कर सकती हैं। शव के पास राम-नाम का जाप करने या धार्मिक ग्रंथ पढ़ने से एक सुरक्षा कवच बनता है।

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जीवाणुओं का बढ़ने लगता है खतरा 

धार्मिक कारणों के साथ-साथ इसका एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है। मृत्यु के तुरंत बाद ही शरीर में डीकंपोजिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और शरीर से एक विशेष प्रकार की गंध निकलने लगती है। इस गंध के कारण लाल चींटियां, मक्खियां, चूहे शव को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रात में कोई न कोई व्यक्ति जागकर शव की रखवाली इसीलिए करता है ताकि शरीर की पवित्रता बनी रहे।

शव के पास रातभर क्या करना चाहिए?

शव के सिरहाने अगर बत्ती जलते रहना चाहिए, ताकि  नकारात्मकता दूर रहे।
गरुड़ पुराण के अनुसार, शव के पास बैठकर ‘भगवद गीता’ का पाठ करना चाहिए।

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Published By:
 Aarya Pandey
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