Garud Puran: मरने के बाद क्या होता है? जानें गरुड़ पुराण क्या कहता है
Garud Puran: हिन्दू धर्म के 18 पुराणों में 'गरुड़ पुराण' का विशेष महत्व है, जिसे अक्सर किसी की मृत्यु के बाद पढ़ा जाता है। यह पुराण मुख्य रूप से मृत्यु, उसके बाद की यात्रा और आत्मा के पुनर्जन्म के रहस्यों पर प्रकाश डालता है।
- धर्म और अध्यात्म
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Garud Puran: हिंदू धर्म में 18 पुराणों का विशेष महत्व है, जिनमें से 'गरुड़ पुराण' को मृत्यु और उसके बाद की यात्रा का सबसे प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है। अक्सर हमारे मन में यह सवाल आता है कि मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? क्या स्वर्ग और नर्क सच में होते हैं? इन सभी रहस्यों से पर्दा उठाता है भगवान विष्णु और उनके वाहन पक्षीराज गरुड़ के बीच का संवाद है।
मृत्यु के समय का अनुभव
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब व्यक्ति की मृत्यु का समय निकट आता है, तो उसकी सभी इंद्रियां शांत हो जाती है। यमलोक से दो यमदूत आत्मा को लेने आते हैं। गरुड़ पुराण कहता है कि जिसने जीवनभर अच्छे कर्म किए हैं, उसे मृत्यु के समय कष्ट नहीं होता और उसे लेने दिव्य विमान आता है। इसके विपरीत, पाप करने वाली आत्मा को यमदूत पाश में बांधकर बलपूर्वक घसीटते हुए ले जाते हैं।
आत्मा की 47 दिनों की यात्रा
मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा को यमलोक ले जाया जाता है, जहां उसे उसके कर्मों का लेखा-जोखा दिखाया जाता है। इसके बाद, आत्मा को पुनः उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है जहां उसकी मृत्यु हुई थी।
13 दिनों तक आत्मा अपने परिजनों के पास रहती है। इसीलिए हिंदू धर्म में 'तेरहवीं' का विधान है, ताकि आत्मा को आगे की यात्रा के लिए ऊर्जा मिल सके।
यमलोक के रास्ते में वैतरणी नदी का वर्णन मिलता है। यह नदी रक्त और मवाद से भरी है। जिन्होंने अपने जीवन में दान-पुण्य किया होता है, वे इसे सुगमता से पार कर लेते हैं, जबकि पापी व्यक्ति इसमें डूबते-उतराते कष्ट सहता है।
'चित्रगुप्त' करते हैं आत्मा के पापों का लेखा-जोखा
यमलोक पहुंचने पर चित्रगुप्त मृत्यु के बाद आत्मा के पापों और पुण्यों का लेखा-जोखा यमराज के सामने रखती है। आपको बता दें, गुरुण पुराण में कुल 84 लाख योनियों यानी कि विभिन्न जन्मों का वर्णन है, जिनमें से 28 मुख्य हैं। बता दें,चोरी, झूठ, बड़ों का अपमान और जीव हत्या जैसे पापों के लिए अलग-अलग दंड निर्धारित हैं। जैसे- तामिस्रम्, अंधतामिस्रम् और रौरव नरक आदि है। पुण्य कर्म करने वाली आत्माओं को स्वर्ग में स्थान मिलता है, जहां वे देवताओं के समान सुख भोगती हैं।
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कर्मों के लेखा-जोखा से होती है मोक्ष की प्राप्ति
स्वर्ग या नर्क में अपने कर्मों का फल भोगने के बाद, आत्मा को पुनः मृत्युलोक पर आना पड़ता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा किस योनि में जन्म लेगी, यह उसके पिछले जन्म के अंतिम समय की इच्छा और कर्मों पर निर्भर करता है। यह चक्र तब तक चलता रहता है जब तक व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त न हो जाए।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।