अपडेटेड 23 January 2026 at 22:34 IST
Saturday Stotra: शनिवार के दिन जरूर करें दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ, काम में आ रही बाधाएं होंगी दूर; मिलेंगे शुभ परिणाम
Saturday Stotra: शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। इस दिन शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को शुभ परिणाम मिल सकते हैं। अब ऐसे में अगर आपके काम में किसी तरह की कोई बाधा आ रही है तो इस दिन दशरथकृत स्तोत्र का पाठ करने का महत्व है। आइए जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Saturday Stotra: हिंदू धर्म में हर दिन का विशेष महत्व है। वहीं शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो सकती है। साथ ही कुंडली में स्थित शनि के अशुभ प्रभाव भी कम हो जाते हैं। अगर आप भी शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करते हैं तो आपको उनकी पूजा में दशरथकृत स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे भाग्योदय हो सकता है।
आप इस स्तोत्र का पाठ करने से पहले शनिदेव के सामने सरसो तेल का दीपक जरूर जलाएं। आइए इस लेख में स्तोत्र का पाठ करने के बारे में जानते हैं।
शनिवार के दिन करें दशरथकृत स्तोत्र का पाठ
शनिवार के दिन आप दशरथकृत स्तोत्र का पाठ जरूर करें। इससे शुभ परिणाम मिल सकते हैं।
दशरथ उवाच:
प्रसन्नो यदि मे सौरे ! एकश्चास्तु वरः परः ॥
रोहिणीं भेदयित्वा तु न गन्तव्यं कदाचन् ।
सरितः सागरा यावद्यावच्चन्द्रार्कमेदिनी ॥
याचितं तु महासौरे ! नऽन्यमिच्छाम्यहं ।
एवमस्तुशनिप्रोक्तं वरलब्ध्वा तु शाश्वतम् ॥
प्राप्यैवं तु वरं राजा कृतकृत्योऽभवत्तदा ।
पुनरेवाऽब्रवीत्तुष्टो वरं वरम् सुव्रत ॥
दशरथकृत शनि स्तोत्र:
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च ।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ॥1॥
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते ॥2॥
नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम: ।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते ॥3॥
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम: ।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने ॥4॥
नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते ।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च ॥5॥
अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते ।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते ॥6॥
तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च ।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ॥7॥
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे ।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥8॥
देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा: ।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत: ॥9॥
प्रसाद कुरु मे सौरे ! वारदो भव भास्करे ।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल: ॥10॥
दशरथ उवाच:
प्रसन्नो यदि मे सौरे ! वरं देहि ममेप्सितम् ।
अद्य प्रभृति-पिंगाक्ष ! पीडा देया न कस्यचित् ॥
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शनिवार के दिन दशरथकृत स्तोत्र का पाठ करने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि शनिवार के दिन दशरथकृत स्तोत्र का पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या व महादशा के कष्टकारी प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर हो जाती है।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 23 January 2026 at 22:34 IST