अपडेटेड 23 January 2026 at 22:07 IST
Border 2 : उत्तराखंड का ये शहर बना बॉर्डर 2 का 'पाकिस्तान', जानें कहां-कहां हुई है फिल्म की शूटिंग
Border 2 : सनी देओल की फिल्म 'बॉर्डर 2' को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। 1997 की कल्ट क्लासिक के इस सीक्वल की शूटिंग इन दिनों जोरों पर है। फिल्म से जुड़ी सबसे दिलचस्प खबर इसकी लोकेशन को लेकर आ रही है। फिल्म के मेकर्स ने पाकिस्तान के दृश्यों को दिखाने के भारत के कुछ जगहों को चुना है। आइए जानते हैं।
- मनोरंजन समाचार
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Border 2 : तकरीबन 28 साल पहले जब 'संदेशे आते हैं' की धुन गूंजी थी, तो हर भारतीय की आंखें नम और सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। आज 23 जनवरी को, उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सनी देओल की 'बॉर्डर 2' बड़े पर्दे पर दस्तक दे चुकी है। फिल्म में वही रोंगटे खड़े कर देने वाला एक्शन है, वही देशभक्ति का जज्बा है और वही सरहद की गर्माहट है।
लेकिन फिल्म देखने के बाद जो सवाल हर सिने-प्रेमी के मन में कौंध रहा है, वो यह कि क्या ये युद्ध के मैदान वाकई भारत-पाक सीमा के हैं? पर्दे पर आप जिन कटीले तारों, बंकरों और धूल उड़ाते टैंकों को देख रहे हैं, उनके पीछे की असलियत बेहद दिलचस्प है। मेकर्स ने फिल्म को 'रियल' फील देने के लिए भारत के ही कई दुर्गम इलाकों को 'मिनी बॉर्डर' में तब्दील कर दिया था।
उत्तराखंड बना 'बॉर्डर 2' का मुख्य रणक्षेत्र
फिल्म की जान इसके युद्ध के दृश्य हैं, और इन्हें जीवंत बनाने के लिए मेकर्स ने उत्तराखंड के देहरादून को अपना मुख्य केंद्र बनाया। देहरादून के संतला देवी और मालदेवता के पास स्थित हल्दूवाला इलाके में एक विशालकाय सेट तैयार किया गया। यहाँ बाकायदा एक कृत्रिम अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाई गई, जिसमें एक तरफ भारतीय चौकियां और दूसरी तरफ पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया।
शूटिंग के दौरान यह पूरा इलाका किसी 'फॉरवर्ड पोस्ट' में बदल गया था। चारों तरफ सैन्य वाहन, असली जैसे दिखने वाले टैंक और जवानों के टेंट लगे थे। सनी देओल ने खुद यहाँ कई दिनों तक रुककर फिल्म के सबसे चुनौतीपूर्ण क्लाइमेक्स दृश्यों को शूट किया है।
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ऋषिकेश से झांसी तक हुई शूटिंग
फिल्म सिर्फ गोलियों की गड़गड़ाहट तक सीमित नहीं है, इसमें प्रकृति और सैनिकों के मानवीय पक्ष को भी दिखाया गया है। ऋषिकेश की पहाड़ियों और राजाजी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों को फिल्म में बेहद खूबसूरती से पिरोया गया है। यह लोकेशन्स युद्ध के तनाव के बीच दर्शकों को विजुअल रिलीफ देती हैं।
टैंकों की असली गड़गड़ाहट और भारी गोलाबारी के सीन के लिए उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बबीना कैंट के सैन्य क्षेत्रों का सहारा लिया गया। यहाँ की जमीन और माहौल युद्ध की फिल्म के लिए एकदम सटीक था।
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मेकर्स का उद्देश्य सिर्फ एक फिल्म बनाना नहीं, बल्कि भारतीय सेना की शैली को दिखाना था। इसीलिए कहानी का कैनवास काफी बड़ा रखा गया है। फिल्म में एक सैनिक के बनने की प्रक्रिया को दिखाने के लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी, पुणे के कुछ हिस्सों का उपयोग किया गया।
सीमावर्ती इलाकों की धूल और तपिश को दिखाने के लिए राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों और अमृतसर की सरहद पर महत्वपूर्ण सीन फिल्माए गए। बर्फीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों की शूटिंग के लिए कश्मीर की वादियों का रुख किया गया।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 23 January 2026 at 22:07 IST