अपडेटेड 4 January 2026 at 14:06 IST
Sankashti Chaturthi 2026 Chalisa: संकष्टी चतुर्थी के दिन जरूर करें भगवान गणेश के इस चालीसा का पाठ, जानें सही नियम
Sankashti Chaturthi 2026 Chalisa: संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में इस दिन बप्पा की एकमात्र ऐसा चालीसा है, जिसका पाठ करने से शुभ परिणाम मिल सकते हैं। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Sankashti Chaturthi 2026 Chalisa: हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत हो या जीवन के संकटों का समाधान, सबसे पहले 'गजानन' को ही याद किया जाता है। भगवान गणेश को समर्पित 'संकष्टी चतुर्थी' का व्रत भक्तों के बीच विशेष महत्व रखता है।
संकष्टी चतुर्थी के दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ-साथ श्री गणेश चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन के सभी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं। आइए इस लेख में विस्तार से संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश चालीसा का पाठ करने के नियम और महत्व के बारे में जानते हैं।
संकष्टी चतुर्थी के दिन करें गणेश चालीसा का पाठ
दोहा
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभः काजू॥
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जै गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
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राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।
गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।
मुषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुची पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै।
पालना पर बालक स्वरूप हवै॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा॥20॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।
काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
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दोहा
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥
गणेश चालीसा का पाठ करने के नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि अगर आपके जीवन में कोई विघ्न या बाधा आ रही है तो गणेश चालीसा का पाठ करने से उत्तम परिणाम मिल सकते हैं। साथ ही व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती है। इतना ही नहीं, बप्पा की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 4 January 2026 at 14:06 IST