अपडेटेड 17 January 2026 at 13:55 IST

Shani Kawach Stotra: शनिवार के दिन जरूर करें शनि कवच स्तोत्र का पाठ, साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव होंगे दूर

Shani Kawach Stotra: आज शनिवार का दिन है और यह दिन शनिदेव को समर्पित है। इस दिन शनिदेव का एकमात्र ऐसा स्तोत्र है, जिसका पाठ करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिल सकता है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

Shani Kawach Stotra
Shani Kawach Stotra | Image: Freepik

Shani Kawach Stotra: हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता और 'कर्मफल दाता' माना गया है। ऐसी मान्यता है कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो, या वह शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से गुजर रहा हो, तो उसे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। इसलिए शनि देव को प्रसन्न करने के लिए 'शनि कवच स्तोत्र' का पाठ करना सबसे अचूक और प्रभावशाली उपाय माना गया है। आइए जानते हैं कि शनिदेव के कवच स्तोत्र का पाठ करने के बारे में विस्तार से जानते हैं।

शनि कवच का करें पाठ 

अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, शनैश्चरो देवता, शीं शक्तिः,
शूं कीलकम्, शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः
नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी गृध्रस्थितत्रासकरो धनुष्मान्।
चतुर्भुज: सूर्यसुत: प्रसन्न: सदा मम स्याद्वरद: प्रशान्त:।1।
श्रृणुध्वमृषय: सर्वे शनिपीडाहरं महंत्।
कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम्।2।
कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम्।
शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्।3।
ऊँ श्रीशनैश्चर: पातु भालं मे सूर्यनंदन:।
नेत्रे छायात्मज: पातु कर्णो यमानुज:।4।
नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा।
स्निग्धकण्ठश्च मे कण्ठ भुजौ पातु महाभुज:।5।
स्कन्धौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रद:।
वक्ष: पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितस्थता।6।
नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा।
ऊरू ममाSन्तक: पातु यमो जानुयुगं तथा।7।
पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल:।
अंगोपांगानि सर्वाणि रक्षेन् मे सूर्यनन्दन:।8।
इत्येतत् कवचं दिव्यं पठेत् सूर्यसुतस्य य:।
न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवन्ति सूर्यज:।9।
व्ययजन्मद्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोSपि वा।
कलत्रस्थो गतोवाSपि सुप्रीतस्तु सदा शनि:।10।
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे।
कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्।11।
इत्येतत् कवचं दिव्यं सौरेर्यन्निर्मितं पुरा।
जन्मलग्नस्थितान्दोषान् सर्वान्नाशयते प्रभु:।12।

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शनि कवच का महत्व

'कवच' का अर्थ 'रक्षा घेरा होता है। जिस प्रकार युद्ध में कवच योद्धा की रक्षा करता है, उसी प्रकार शनि कवच का पाठ करने से भक्त न केवल नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में आ रही सभी परेशानियां दूर हो सकती है।

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शनि कवच स्तोत्र के पाठ की विधि

  • शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में या किसी शनि मंदिर में जाकर शनि देव की मूर्ति या यंत्र के सामने बैठें।
  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें थोड़े काले तिल डाल दें।
  • हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना बोलें और शनि देव से रक्षा की प्रार्थना करें।
  • पाठ के बाद सामर्थ्य अनुसार काली उड़द, काले कपड़े या तिल का दान करना अत्यंत शुभ होता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 17 January 2026 at 13:55 IST