अपडेटेड 27 January 2026 at 23:45 IST
Pradosh Vrat 2026 Puja: प्रदोष व्रत के दिन कैसे करनी चाहिए भगवान शिव की पूजा? जान लें सही विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त
Pradosh Vrat 2026 Lord Shiva Puja: प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का एक सरल और प्रभावी उपाय है। अगर आप सच्चे मन से इस दिन पूजा करते हैं, तो शिव जी आपकी हर परेशानी दूर कर सकते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Pradosh Vrat 2026 Lord Shiva Puja Vidhi: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक बहुत ही खास व्रत माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। तो चलिए जानते हैं कि प्रदोष व्रत 2026 में भगवान शिव की पूजा कैसे करनी चाहिए और पूजा का शुभ समय क्या है।
प्रदोष व्रत 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को सुबह 11 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 31 जनवरी को सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। वैसे तो सभी व्रत उदयातिथि के अनुसार रखे जाते हैं लेकिन प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का पूजन प्रदोष काल में रखा जाता है। इसी कारण जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। बता दें कि इस दिन शुक्रवार पड़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष नाम दिया गया है।
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 30 जनवरी को सुबह 11 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 31 जनवरी को सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त रहने वाला है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और ऐसे में यदि उनका विधि-विधान से पूजन किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
प्रदोष व्रत का महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इस समय की गई पूजा से रोग, कर्ज, तनाव और मन की शांति से जुड़ी समस्याओं का नाश होता है। खासतौर पर जो लोग जीवन में स्थिरता और सफलता चाहते हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत फलदायी माना जाता है।
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प्रदोष व्रत के दिन पूजा की सही विधि क्या है?
प्रदोष व्रत की पूजा विधि बहुत कठिन नहीं है। श्रद्धा और साफ मन से पूजा करना ही सबसे जरूरी है।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करें।
- पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भस्म और सफेद फूल अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में आरती करें और भगवान शिव से मनोकामना मांगें।
प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है। इस समय को ही प्रदोष काल कहा जाता है। माना जाता है कि यही समय भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ होता है। आमतौर पर यह समय सूर्यास्त के बाद लगभग 1.5 से 2 घंटे तक रहता है।
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व्रत में क्या करें और क्या न करें ?
क्या करें?
प्रदोष व्रत के पूरे दिन सात्विक भोजन करें और सात्विक जीवन व्यतीत करें। इसके अलावा मन में सकारात्मक विचार रखें और जरूरतमंदों की मदद जरूर करें।
क्या न करें?
प्रदोष व्रत के दिन झूठ, क्रोध और नकारात्मक सोच से बचें और तामसिक भोजन न करें। इसके अलावा पूजा में लापरवाही बिल्कुल भी न करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 27 January 2026 at 23:44 IST