अपडेटेड 16 February 2026 at 14:25 IST
Phulera Dooj 2026: 18 या 19 फरवरी कब है फुलेरा दूज? राधा-कृष्ण से है बेहद खास संबंध; ब्रज में खेली जाएगी फूलों की होली
Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज का सीधा संबंध भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम से है। अब ऐसे में इस साल फुलेरा दूज कब मनाया जाएगा? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Phulera Dooj 2026: हिंदू धर्म में फुलेरा दूज का विशेष महत्व है। इसे साल के सबसे शुभ और 'अबूझ मुहूर्तों' में से एक माना जाता है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार प्रेम, उल्लास और श्रद्धा का संगम है। खासकर ब्रज में फुलेरा दूज का विशेष महत्व है।
लेकिन, साल 2026 में इसकी सही तारीख को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन है कि फुलेरा दूज कब मनाया जाएगा और इसका महत्व क्या है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
18 या 19 फरवरी कब है फुलेरा दूज ?
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 18 फरवरी 2026 की शाम से होगी और इसका समापन 19 फरवरी 2026 को होगा। हिंदू धर्म में त्योहार उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। इसलिए
19 फरवरी गुरुवार को फुलेरा दूज का पर्व मनाया जाएगा।
इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे कार्यों के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना जाता है।
राधा-कृष्ण से है बेहद खास संबंध
फुलेरा दूज का सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार व्यस्तता के कारण कान्हा लंबे समय तक राधा जी से मिलने नहीं जा पाए। इससे राधा जी दुखी हो गईं और उनके विरह में प्रकृति का सौंदर्य भी फीका पड़ने लगा, फूल मुरझा गए।
जब श्रीकृष्ण को यह पता चला, तो वे तुरंत राधा जी से मिलने पहुंचे। उनके आगमन से प्रकृति फिर खिल उठी और कृष्ण ने एक खिला हुआ फूल तोड़कर राधा जी पर फेंक दिया। इसके बाद राधा जी ने भी कृष्ण पर फूल फेंके। देखते ही देखते वहां मौजूद ग्वाल-बाल और गोपियों ने भी फूलों की वर्षा शुरू कर दी। माना जाता है कि इसी दिन से फूलों की होली खेलने की परंपरा शुरू हुई।
ब्रज में फूलों की होली की धूम
मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज क्षेत्र में फुलेरा दूज के दिन से ही होली का आगाज हो जाता है। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण को फूलों से सजाया जाता है और भक्तों पर फूलों की वर्षा की जाती है। मंदिरों में राधा-कृष्ण का अद्भुत श्रृंगार होता है। भगवान के कमर पर एक छोटा सा रंगीन कपड़ा बांधा जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि वे अब होली खेलने के लिए तैयार हैं। इस दिन विशेष तरह के पकवान बनाएं जाते हैं।
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फुलेरा दूज पर क्यों करें शादी-ब्याह?
ज्योतिष शास्त्र में इसे 'दोषमुक्त' दिन माना गया है। यदि किसी की कुंडली में ग्रहों का योग विवाह के लिए सही न बैठ रहा हो, तो वे इस दिन बिना किसी बाधा के विवाह बंधन में बंध सकते हैं। फाल्गुन मास को वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ बनाती है। इससे दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहती है।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 16 February 2026 at 14:25 IST