Navratri Day 7: सातवें दिन ऐसे करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें कथा, माता रानी को पसंद है ये भोग
Navratri Day 7: नवरात्रि का हर दिन माता रानी के अलग-अलग स्वरूप को समर्पित होता है। सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। ऐसे में चलिए उनकी कथा के बारे में जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
- 2 min read

Navratri Day 7: आज यानि सोमवार को शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है और ये दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। इस दिन का विशेष महत्व है, जिसे महा सप्तमी भी कहा जाता है। मां कालरात्रि मां दुर्गा के सबसे उग्र स्वरूप हैं जिन्हें अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाली देवी माना जाता है।
नवरात्रि का हर दिन माता रानी के अलग-अलग स्वरूप को समर्पित होता है। सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। ऐसे में चलिए उनकी कथा के बारे में जानते हैं।
मां कालरात्रि की कथा
एक बार पृथ्वी पर शुंभ और निशुंभ नाम के राक्षसों ने आतंक मचा रखा था। शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नाम के राक्षसों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया, तब सभी देवताओं ने रक्षा मांगते हुए देवी दुर्गा की पूजा की। रक्तबीज को वरदान मिला हुआ था कि उसका जितना रक्त धरती पर गिरता, उतने ही उस जैसे बलवान राक्षस पैदा हो जाते थे। तब मां दुर्गा ने अपनी शक्ति से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया जिसने रक्तबीज का सारा रक्त पीकर उसे खत्म कर दिया। इसी तरह मां कालरात्रि ने तीनों लोकों को राक्षसों के आतंक से मुक्त करा दिया।
मां कालरात्रि की पूजा ऐसे करें
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। उसके बाद मां कालरात्रि की पूजा और व्रत का संकल्प लें। पूजा करने के लिए एक चौकी सजाएं जिसपर मां कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। फिर माता को रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें।
Advertisement
मां कालरात्रि का प्रिय फूल रातरानी और गुड़हल होता है, ऐसे में यही फूल माता रानी को चढ़ाएं। बात करें भोग की तो माता कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का ही भोग लगाया जाना चाहिए। इससे माता कालरात्रि खुश होती हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। फिर उनका मंत्र ॐ देवी कालरात्र्यै नमः का उच्चारण करें। अंत में मां कालरात्रि की आरती करें।