अपडेटेड 8 January 2026 at 08:16 IST

Lohri 2026: क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार? जानें सही तिथि, महत्व और खास बातें

Lohri 2026 Significance: लोहड़ी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि खुशी, परंपरा और एकता का प्रतीक है। यह पर्व नई शुरुआत, अच्छी फसल और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।

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क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार? | Image: AI

Lohri 2026 Date And Significance In Hindi: लोहड़ी उत्तर भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा का एक बहुत ही लोकप्रिय और खुशियों से भरा त्योहार है। यह पर्व सर्दियों के मौसम की विदाई और नई फसल के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। आग के चारों ओर नाच-गाना, मूंगफली-रेवड़ी बांटना और अपनों के साथ खुशियां मनाना लोहड़ी की खास पहचान है। तो चलिए जानते हैं लोहड़ी 2026 की सही तिथि, इसका महत्व और इससे जुड़ी रोचक बातें।

लोहड़ी 2026 की सही तिथि क्या है?

लोहड़ी का त्योहार हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है। साल 2026 में भी लोहड़ी 13 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह पर्व मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आता है।

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लोहड़ी क्यों मनाई जाती है?

लोहड़ी मुख्य रूप से नई फसल यानी रबी की फसल के पकने की खुशी में मनाई जाती है। इस समय गेहूं की फसल खेतों में लहलहा रही होती है। किसान ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और अच्छी पैदावार की कामना करते हैं।

इसके अलावा, लोहड़ी का त्योहार सूर्य देव की उपासना के लिए भी मनाया जाता है। यह सर्दियों के अंत और गर्मी की शुरुआत के प्रतीक के रूप में भी मनाई जाती है। साथ ही, जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाने का प्रतीक भी माना जाता है।

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लोहड़ी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?

लोहड़ी के दिन अग्नि देव की पूजा की जाती है। इस दिन लोग आग में तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और पॉपकॉर्न अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। वहीं जिन घरों में नवविवाहित दंपती या नवजात शिशु होता है, वहां लोहड़ी खास धूमधाम से मनाई जाती है।

लोहड़ी से जुड़ी खास कथा

लोहड़ी का संबंध दुल्ला भट्टी की कथा से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि दुल्ला भट्टी ने मुगल काल में गरीब लड़कियों की रक्षा की और उनका विवाह कराया था। इसी कारण लोहड़ी के गीतों में आज भी दुल्ला भट्टी का नाम लिया जाता है।

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दुल्ला भट्टी कौन था?

दुल्ला भट्टी पंजाब का एक प्रसिद्ध पंजाब के एक वीर योद्धा और लोकनायक था, जिसे लोग आज भी बहादुरी और इंसानियत के लिए याद करते हैं। कहा जाता है कि वह मुगल काल में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करता था। दुल्ला भट्टी ने कई गरीब लड़कियों को अत्याचार से बचाया और उनका विवाह अच्छे घरों में करवाया। वह अमीरों से लूटा हुआ धन गरीबों में बांट देता था, इसलिए लोग उसे अपना रक्षक मानते थे। उसकी दयालुता और साहस के कारण ही आज भी लोहड़ी के गीतों में उसका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

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लोहड़ी पर क्या-क्या किया जाता है?

  • लोहड़ी के दिन शाम के समय अलाव जलाया जाता है। 
  • लोग पारंपरिक गीत गाते हैं और भांगड़ा-गिद्धा करते हैं। 
  • मूंगफली, तिल, गुड़, रेवड़ी और गजक बांटी जाती है। 
  • परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां मनाई जाती हैं।

लोहड़ी का त्यौहार क्या संदेश देता है?

लोहड़ी हमें सिखाती है कि हमें प्रकृति के साथ जुड़कर रहना चाहिए। इसके अलावा मेहनत का सम्मान करना चाहिए और आपस में जलन-इर्षा नहीं, बल्कि खुशियां बांटें और मिल-जुलकर सबके साथ में उत्सव मनाएं। 

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 8 January 2026 at 08:11 IST