अपडेटेड 19 February 2026 at 14:41 IST
Holashtak 2026 Kab Hai: होलाष्टक कब से हो रहा है शुरू? भूलकर भी न करें ये काम; जानें सही नियम
Holashtak 2026 Kab Hai: सनातन धर्म में होली का त्योहार उल्लास और रंगों का प्रतीक है, लेकिन इससे ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक की अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। आइए इस लेख में विस्तार से होलाष्टक के नियम के बारे में जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Holashtak 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में हर महीने और हर तिथि पर व्रत और त्योहार पड़ता है। हर पर्व को बेहद शुभ माना जाता है। वहीं अब जल्द ही होली का त्योहार आ रहा है। लेकिन उससे ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। होलाष्टक 8 दिनों तक चलता है और इस दौरान कई धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है। आपको बता दें, होलाष्टक के 8 दिनों में कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। इस दौरान कोई भी नया काम शुरू नहीं करना चाहिए। इससे शुभ नहीं माना जाता है। होलाष्टक में भक्ति और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।
अब ऐसे में इस साल होलाष्टक कब से शुरू हो रहा है? साथ ही इस दौरान किन नियमों का पालन करना जरूरी है। इसके बारे में इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
होलाष्टक की सही तिथि और समय
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरुआत होती है, जो पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक चलती है।
- होलाष्टक प्रारंभ- 24 फरवरी 2026 मंगलवार से आरंभ
- अष्टमी तिथि शुरू- 24 फरवरी, सुबह 07:01 बजे से
- होलाष्टक समाप्त- 03 मार्च 2026, मंगलवार होलिका दहन के साथ हो जाएगा।
- रंग वाली होली- 04 मार्च 2026, बुधवार को है।
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होलाष्टक में भूलकर भी न करें ये काम
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के इन आठ दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है। अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक क्रमशः चंद्रमा, सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और राहु अपनी उग्र अवस्था में होते हैं। ग्रहों के इस नकारात्मक प्रभाव के कारण इस समय किए गए मांगलिक कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और बाधाएं आने की आशंका रहती है। पौराणिक कथा के अनुसार, इन 8 दिनों में ही भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने कठिन यातनाएं दी थीं। वहीं, एक अन्य मान्यता है कि भगवान शिव ने कामदेव को इन्हीं दिनों में भस्म किया था। शोक और असुरक्षा की इसी भावना के कारण इसे शुभ नहीं माना जाता है।
- इन आठ दिनों में शादी-ब्याह या सगाई जैसे कार्य वर्जित हैं।
- नए घर में प्रवेश या नींव पूजन न करें।
- बच्चों के मुख्य संस्कार इस अवधि में टाल देने चाहिए।
- नया वाहन, कीमती आभूषण या मकान खरीदने से बचें।
- नया व्यापार या कोई बड़ा निवेश करने से बचें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 19 February 2026 at 14:38 IST