Guru Pradosh Vrat 2026: मई के पहले प्रदोष व्रत पर ऐसे करें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

Guru Pradosh Vrat 2026 Puja Vidhi: गुरु प्रदोष व्रत बहुत ही फलदायी और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत रखता है। उसके विरोधियों और शत्रुओं का नाश होता है और हर काम में सफलता मिलती है। महादेव के साथ बृहस्पति देव की कृपा मिलने से वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां और बाधाएं दूर हो जाती हैं।

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गुरु प्रदोष व्रत 2026 | Image: AI

Lord Shiva And Mata Parvati Puja: हिन्दू धर्म में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत का बहुत महत्व है। हर महीने में दो बार प्रदोष व्रत आता है एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। यह व्रत हमेशा त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस बार मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है।

गुरुवार का दिन होने के कारण, इस दिन पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ देवताओं के गुरु, बृहस्पति देव का भी विशेष आशीर्वाद मिलता है। तो चलिए जानते हैं कि इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, सामग्री क्या लगेगी और पूजा कैसे करनी चाहिए।

गुरु प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत में शाम की पूजा (प्रदोष काल) का सबसे ज्यादा महत्व होता है, क्योंकि माना जाता है कि इस समय महादेव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं।

  • व्रत की तारीख: 14 मई 2026, गुरुवार
  • त्रयोदशी तिथि शुरू: 14 मई 2026, सुबह 11:21 बजे से
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई 2026, सुबह 08:32 बजे तक
  • पूजा का शुभ समय (प्रदोष काल): शाम 07:04 बजे से रात 09:09 बजे तक

पूजा की सामग्री

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पूजा शुरू करने से पहले इन सभी चीजों को एक जगह इकट्ठा कर लें, ताकि पूजा के दौरान आपको बार-बार उठना न पड़े:

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  • अभिषेक के लिए: शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर इन सबको मिलाकर पंचामृत भी बनाया जा सकता है।
  • चढ़ाने के लिए: सफेद चंदन, भस्म, साबुत चावल यानी अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, आक के फूल और सफेद फूल।
  • अन्य जरूरी चीजें: कलावा, शुद्ध घी, रुई की बत्ती, कपूर, अगरबत्ती, धूप, ताजे फल और मिठाई।

पूजा विधि

अगर आप गुरु प्रदोष का व्रत रख रहे हैं, तो इस आसान तरीके से महादेव की पूजा करें।

  • सुबह का संकल्प: सुबह जल्दी उठकर नहा लें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद अपने घर के मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के सामने हाथ जोड़कर व्रत रखने का संकल्प लें।
  • दिनभर का नियम: पूरे दिन सात्विक रहें और बुरे विचारों से दूर रहें। आप अपनी क्षमता के अनुसार बिना पानी का यानी निराहार या फिर फलाहार यानी फल खाकर व्रत रख सकते हैं। दिनभर मन ही मन भगवान शिव के नामों या 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते रहें।
  • शाम की तैयारी: शाम को प्रदोष काल की पूजा से पहले एक बार फिर से नहाएं या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ कपड़े पहनें। अगर संभव हो तो सफेद रंग के कपड़े पहनें, क्योंकि शिव जी को सफेद रंग बहुत प्रिय है।
  • अभिषेक करें: सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल चढ़ाएं। उसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं और आखिर में फिर से शुद्ध जल चढ़ाकर शिवलिंग को साफ करें।
  • चीजें अर्पित करें: अब भगवान शिव को सफेद चंदन और भस्म लगाएं। फिर बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, भांग, फूल और फल-मिठाई प्यार से चढ़ाएं।
  • पाठ और आरती: धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें और गुरु प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें। सबसे आखिर में घी का दीपक और कपूर जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
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गुरु प्रदोष व्रत का क्या महत्व है?

गुरु प्रदोष व्रत बहुत ही फलदायी और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत रखता है। उसके विरोधियों और शत्रुओं का नाश होता है और हर काम में सफलता मिलती है। महादेव के साथ बृहस्पति देव की कृपा मिलने से वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां और बाधाएं दूर हो जाती हैं।  व्यक्ति के ज्ञान, बुद्धि और घर में सुख-शांति की वृद्धि होती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By:
 Samridhi Breja
पब्लिश्ड