Garud Puran: गरुड़ पुराण के अनुसार सबसे अच्छी मृत्यु कौन सी होती है?
Garud Puran: सनातन धर्म में मृत्यु को केवल जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए सफर की शुरुआत माना गया है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के संवाद के माध्यम से मृत्यु, आत्मा के सफर और मोक्ष का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस पुराण के अनुसार, सबसे श्रेष्ठ और उत्तम मृत्यु वह है जिसे 'सुलभ मृत्यु' या 'कल्याणकारी मृत्यु' कहा जाता है। आइए जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Garud Puran: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है। आमतौर पर लोग इसे किसी की मृत्यु के बाद ही सुनते या फिर पढ़ते हैं। जिस कारण इसे केवल शोक और मृत्यु से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन देखा जाए तो गरुड़ पुराण केवल मरने के बाद तक ही पढ़ना सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला और मोक्ष प्राप्ति का एक दिव्य रास्ता बताया गया है। अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि इस संसार में सबसे अच्छी मृत्यु क्या है?
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने स्वयं अपने वाहन पक्षीराज गरुड़ को बताया है कि कौन सी मृत्यु सबसे श्रेष्ठ और भाग्यशाली होती है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
सचेत अवस्था में मृत्यु होना
गरुड़ पुराण के अनुसार, सबसे अच्छी मृत्यु वह है जिसमें व्यक्ति अपने अंतिम समय में पूरी तरह सचेत यानी होश में हो। अचानक, बिना संभले या सोते-सोते प्राण निकल जाना बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। जब व्यक्ति को अपनी मृत्यु का आभास होता है और वह अपने अंतिम क्षणों में भयभीत होने के बजाय शांत रहता है, तो उसे उत्तम मृत्यु कहा जाता है।
मुख में गंगाजल और तुलसी दल होना
जिस व्यक्ति के प्राण छूटते समय उसके मुख में पवित्र गंगाजल और तुलसी का पत्ता हो, उसे परम भाग्यशाली माना गया है। तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और गंगाजल पापों का नाश करने वाला है। इन दोनों की उपस्थिति में प्राण त्यागने वाले जीव को यमदूत प्रताड़ित नहीं करते और उसे सीधे भगवान के धाम में स्थान मिलता है।
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अंतिम समय में भगवान का नाम लेना
अंत मति सो गति यानी कि अंत समय में जैसी सोच होती है, वैसी ही अगला जन्म और उसी प्रकार मोक्ष मिलता है। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन के आखिरी पलों में सांसारिक मोह-माया, धन-दौलत या परिवार की चिंता छोड़कर केवल भगवान विष्णु या अपने इष्टदेव का नाम लेता है, तो उसकी मृत्यु सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। ऐसे में आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तीर्थ स्थान या पवित्र नदी के तट पर प्राण त्यागना
पवित्र तीर्थ स्थलों जैसे काशी , हरिद्वार या किसी पवित्र नदी के तट पर प्राण त्यागना सर्वोत्तम माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, काशी में साक्षात भगवान शिव तारक मंत्र देते हैं, जिससे जीव को सीधे मोक्ष मिलता है।
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बिना कष्ट के शांत मृत्यु
जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में कभी किसी का दिल नहीं दुखाया और हमेशा धर्म के मार्ग पर चला, उसकी मृत्यु बहुत शांत होती है। गरुड़ पुराण में लिखा है कि पापियों के प्राण शरीर के निचले अंगों से बहुत कष्ट के साथ निकलते हैं, जबकि पुण्यात्माओं के प्राण बड़ी आसानी से, बिना किसी तड़प के, मुख या आंखों के रास्ते निकल जाते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।