अपडेटेड 12 March 2026 at 14:46 IST
Friday Maa Lakshmi Stotra: शुक्रवार के दिन करें देवराज इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ, सुख-समृद्धि के साथ धन की होगी प्राप्ति
Friday Maa Lakshmi Stotra: हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा विधिवत रूप से करने से व्यक्ति को उत्तम फलों की प्राप्ति हो सकती है। अब ऐसे में अगर आप मां लक्ष्मी की पूजा कर रहे हैं तो इस दिन इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने का विशेष महत्व है। आइए इस
- धर्म और अध्यात्म
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Friday Maa Lakshmi Stotra: सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन केवल एक वार नहीं, बल्कि ऐश्वर्य, सौंदर्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह दिन धन की अधिष्ठात्री देवी, मां लक्ष्मी को समर्पित है। यदि आप जीवन में आर्थिक स्थिरता, सौभाग्य और सांसारिक सुखों की कामना रखते हैं, तो शुक्रवार की भक्ति आपके भाग्य के द्वार खोल सकती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा विधिवत रूप से करने से धन लाभ हो सकती है। अब ऐसे में इस दिन देवराज इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने से उत्तम फलों की प्राप्ति हो सकती है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
शुक्रवार के दिन करें देवराज इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ
ॐ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः ।
कृष्णप्रियायै सारायै पद्मायै च नमो नमः ॥१॥
पद्मपत्रेक्षणायै च पद्मास्यायै नमो नमः ।
पद्मासनायै पद्मिन्यै वैष्णव्यै च नमो नमः ॥२॥
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सर्वसम्पत्स्वरूपायै सर्वदात्र्यै नमो नमः ।
सुखदायै मोक्षदायै सिद्धिदायै नमो नमः ॥३॥
हरिभक्तिप्रदात्र्यै च हर्षदात्र्यै नमो नमः ।
कृष्णवक्षःस्थितायै च कृष्णेशायै नमो नमः ॥४॥
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कृष्णशोभास्वरूपायै रत्नपद्ये च शोभने ।
सम्पत्त्यधिष्ठातृदेव्यै महादेव्यै नमो नमः ॥५॥
शस्याधिष्ठातृदेव्यै च शस्यायै च नमो नमः।
नमो बुद्धिस्वरूपायै बुद्धिदायै नमो नमः ॥६॥
वैकुण्ठे या महालक्ष्मीर्लक्ष्मीः क्षीरोदसागरे ।
स्वर्गलक्ष्मीरिन्द्रगेहे राजलक्ष्मीर्नृपालये ॥७॥
गृहलक्ष्मीश्च गृहिणां गेहे च गृहदेवता ।
सुरभी सा गवां माता दक्षिणा यज्ञकामिनी ॥८॥
अदितिर्देवमाता त्वं कमला कमलालये ।
स्वाहा त्वं च हविर्दाने कव्यदाने स्वधा स्मृता ॥९॥
त्वं हि विष्णुस्वरूपा च सर्वाधारा वसुन्धरा ।
शुद्धसत्त्वस्वरूपा त्वं नारायणपरायणा ॥१०॥
क्रोधहिंसावर्जिता च वरदा च शुभानना ।
परमार्थप्रदा त्वं च हरिदास्यप्रदा परा ॥११॥
यया विना जगत् सर्वं भस्मीभूतमसारकम् ।
जीवन्मृतं च विश्वं च शवतुल्यं यया विना ॥१२॥
सर्वेषां च परा त्वं हि सर्वबान्धवरूपिणी ।
यया विना न सम्भाष्यो बान्धवैर्बान्धवः सदा ॥१३॥
त्वया हीनो बन्धुहीनस्त्वया युक्तः सबान्धवः ।
धर्मार्थकाममोक्षाणां त्वं च कारणरूपिणी ॥१४॥
यथा माता स्तनन्धानां शिशूनां शैशवे सदा ।
तथा त्वं सर्वदा माता सर्वेषां सर्वरूपतः ॥१५॥
मातृहीनः स्तनत्यक्तः स चेज्जीवति दैवतः ।
त्वया हीनो जनः कोऽपि न जीवत्येव निश्चितम् ॥१६॥
सुप्रसन्नस्वरूपा त्वं मां प्रसन्ना भवाम्बिके ।
वैरिग्रस्तं च विषयं देहि मह्यं सनातनि ॥१७॥
वयं यावत् त्वया हीना बन्धुहीनाश्च भिक्षुकाः ।
सर्वसम्पद्विहीनाश्च तावदेव हरिप्रिये ॥१८॥
राज्यं देहि श्रियं देहि बलं देहि सुरेश्वरि ।
कीर्ति देहि धनं देहि यशो मह्यं च देहि वै ॥१९॥
कामं देहि मतिं देहि भोगान् देहि हरिप्रिये।
ज्ञानं देहि च धर्मं च सर्वसौभाग्यमीप्सितम् ॥२०॥
प्रभावं च प्रतापं च सर्वाधिकारमेव च ।
जयं पराक्रमं युद्धे परमैश्वर्यमेव च ॥२१॥
देवराज इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने का महत्व
देवराज इन्द्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो सकती है। अगर आपको बार-बार आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो इससे भी छुटकारा मिल सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 12 March 2026 at 14:46 IST