अपडेटेड 28 January 2026 at 23:44 IST

Sankashti Chaturthi 2026 February: 5 या 6 फरवरी... कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Sankashti Chaturthi 2026 Kab Hai: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सुकर्मा योग बनने से व्रत का फल और भी शुभ माना जा रहा है। अगर आप जीवन की परेशानियों से मुक्ति और घर में सुख-शांति चाहते हैं, तो इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ भगवान गणेश की पूजा जरूर करें।

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 | Image: Freepik

Sankashti Chaturthi 2026 February Date : सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और भगवान गणेश को समर्पित होता है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भक्त संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन के विघ्नों से मुक्ति की कामना करते हैं। तो आइये जानते हैं कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी और जानेंगे इससे जुड़ी अन्य सभी बातें-

कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत 5 फरवरी 2026 को रात 12 बजकर 09 मिनट से लेकर अगले दिन 6 फरवरी 2026 को रात 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 क्यों है खास महत्व?

इस वर्ष द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सुकर्मा योग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा से भगवान गणेश जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व क्या है?

यह व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए किया जाता है। बता दें कि यह व्रत संतान सुख, लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए खास माना जाता है। इसके अलावा जीवन में आने वाली बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। साथ ही, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

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संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि क्या है?

  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। 
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें। 
  • भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। 
  • दूर्वा, फूल, मोदक और लड्डू अर्पित करें। 
  • “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। 
  • शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य दें। 
  • चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें।
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चंद्र दर्शन का महत्व क्या है?

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूरा होता है। चंद्रमा को जल अर्पित कर भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 में 5 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन सुकर्मा योग बनने से व्रत का फल और भी शुभ माना जा रहा है। अगर आप जीवन की परेशानियों से मुक्ति और घर में सुख-शांति चाहते हैं, तो इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ भगवान गणेश की पूजा जरूर करें।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 28 January 2026 at 23:44 IST