अपडेटेड 15 January 2026 at 17:57 IST
Basant Panchami 2026 Kab Hai: 23 या 24 जनवरी कब है बसंत पंचमी? जानें मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व
Basant Panchami 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में बसंत पंचमी को बेहद सैभाग्यशाली माना जाता है। इस दिन साहित्य, कला और ज्ञान की देवी की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में इस साल बसंत पंचंमी कब मनाया जाएगा? आइए जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Basant Panchami 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में बसंत पंचमी के त्योहार का विशेष महत्व है। इसे 'ऋतुराज' बसंत के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मोत्सव मनाया जाता है। हर साल माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।
लेकिन साल 2026 में बसंत पंचमी को लेकर लोगों कंफ्यूजन में हैं कि कब है और किस मुहूर्त में मां सरस्वती की पूजा विधिवत रूप से की जाएगी? इस लेख को विस्तार से पढ़ें।
23 या 24 जनवरी कब है बसंत पंचमी?
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को अर्धरात्रि 02 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इसका समापन 24 जनवरी को अर्धरात्रि 01 बजकर 46 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा
मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त
सरस्वती पूजा के लिए दिन का ऊपरी भाग यानी दोपहर से पहले का समय सबसे शुभ होता है।
पूजा का शुभ समय- सुबह 07:12 से दोपहर 12:35 तक
अबूझ मुहूर्त- बसंत पंचमी को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है, इसलिए इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
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बसंत पंचमी का महत्व क्या है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने जब संसार की रचना की, तो उन्हें चारों ओर मौन दिखाई दिया। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे देवी सरस्वती प्रकट हुईं। उनके हाथ में वीणा, पुस्तक और माला थी। जैसे ही उन्होंने वीणा बजाई, संसार को वाणी और सुर मिले।
छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत करने के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है। इसे 'अक्षर अभ्यासम' भी कहा जाता है।बसंत ऋतु में सरसों की फसल लहलहाती है और चारों ओर पीले फूल दिखाई देते हैं। पीला रंग ऊर्जा, उत्साह और शुद्धता का प्रतीक है। इसलिए इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और मां सरस्वती को पीले मीठे चावल या बूंदी का भोग लगाते हैं।
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Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 15 January 2026 at 17:57 IST