Pradosh Vrat June 2026: 12 या 13 जून...कब है अधिक मास का प्रदोष व्रत? जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
Pradosh Vrat 2026 Date: अधिक मास को भगवान विष्णु और देवों के देव महादेव की कृपा पाने का सबसे पवित्र महीना माना गया है। ऐसे में अधिक मास के शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।
- धर्म और अध्यात्म
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Pradosh Vrat 2026 Lord Shiva Significance: जून 2026 में प्रदोष व्रत को लेकर यदि आपके मन में उलझन है कि व्रत 12 जून को रखना है या 13 जून को, तो यह लेख आपके लिए ही है। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, और जब यह अधिक मास में पड़ता है, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। तो चलिए जानते हैं कि इस बार व्रत की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
कब है अधिक मास का प्रदोष व्रत?
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून 2026 को रात 07 बजकर 36 मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन 13 जून 2026 को शाम 04 बजकर 07 मिनट पर होगा।
सही तिथि: चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए प्रदोष काल का समय 12 जून को मिल रहा है। इसी वजह से शुक्र प्रदोष व्रत 12 जून 2026 को ही रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त और विशेष योग
इस बार का प्रदोष व्रत बेहद खास है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस योग में की गई पूजा और शुभ कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।
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- पूजा का शुभ समय: शाम 07:36 बजे से रात 09:20 बजे तक।
- विशेष: भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए यह 1 घंटे 44 मिनट का समय सबसे उत्तम रहेगा।
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
अधिक मास को भगवान विष्णु और देवों के देव महादेव की कृपा पाने का सबसे पवित्र महीना माना गया है। ऐसे में अधिक मास के शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।
- वैवाहिक सुख और समृद्धि: मान्यता है कि शुक्र प्रदोष व्रत करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
- पापों से मुक्ति: ऐसा माना जाता है कि प्रदोष काल में पूरी श्रद्धा से शिव जी का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है।
- मानसिक शांति: जो लोग मानसिक तनाव या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत सुख, शांति और तरक्की लेकर आता है।
अगर आप भी महादेव और माता पार्वती की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो 12 जून को व्रत रखकर प्रदोष काल में शिव जी की पूजा-अर्चना जरूर करें।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।