अपडेटेड 24 January 2026 at 16:22 IST
Achla Saptami 2026: कल है अचला सप्तमी, इस दिन भूलकर भी न खाएं ये चीजें; वरना लग जाएगा दोष
Achla Saptami 2026: हिंदू धर्म में अचला सप्तमी का व्रत सुख-सौभाग्य का कारक माना जाता है। पंचांग के हिसाब से माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन सूर्यदेव की पूजा विधिवत रूप से की जाती है। अब ऐसे में इस दिन क्या-क्या खाने से बचना चाहिए? आइए जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Achla Saptami 2026: हिंदू धर्म में सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को सबसे खास माना जाता है। इसे अचला सप्तमी, रथ सप्तमी या सूर्य जयंती के नाम से जाना जाता है। वहीं 25 जनवरी को अचला सप्तमी का व्रत रखा जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य देव ने अपने प्रकाश से पूरी सृष्टि को आलोकित किया था, इसलिए इसे सूर्य देव के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है।
इस दिन व्रत रखने से सुख-सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही इस दिन कुछ ऐसे नियम हैं, जिनका पालन करने का विशेष विधान है। आइए इस लेख में विस्तार से अचला सप्तमी के दिन क्या खाने से बचना चाहिए? इसके बारे में जानते हैं।
अचला सप्तमी के दिन क्या खाने से बचना चाहिए?
- अचला सप्तमी के व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन बिना नमक का भोजन करने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर निरोगी रहता है। यदि आप पूर्ण व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तो भी इस दिन नमक से परहेज करना शुभ होता है।
- इस दिन किसी भी पावन पर्व की तरह, अचला सप्तमी पर मांस, मछली, अंडा और मदिरा का सेवन घोर पाप माना जाता है। इस दिन सात्विकता का पालन करना अनिवार्य है। लहसुन और प्याज को तामसिक माना जाता है। इसलिए इस दिन सादा खाना ही खाएं।
- सूर्य देव की पूजा वाले दिन इनके सेवन से मन की एकाग्रता भंग होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा कम होती है। शास्त्रों में व्रत के दौरान मसूर की दाल, गाजर और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ के सेवन की मनाही है। इसलिए इन बातों का जरूर ध्यान रखें।
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अचला सप्तमी के दिन सूर्यदेव की पूजा का महत्व
- अचला सप्तमी को 'भानु सप्तमी' भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने का विधान है। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- इस दिन बहते जल में दीप प्रवाहित करने का भी विशेष महत्व है। इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को गुड़, गेहूं और तांबे के बर्तनों का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 24 January 2026 at 16:22 IST