'इस भव्य मंदिर से भारत-फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को ऊर्जा मिलेगी', पेरिस में स्वामीनारायण टेंपल के उद्घाटन पर बोले PM मोदी

पीएम मोदी ने फ्रांस के शहर पेरिस में भव्य BAPS स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन किया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यह भव्य स्वामीनारायण मंदिर भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है।

PM Modi Swaminarayan temple paris
PM Modi Swaminarayan temple paris | Image: Swaminarayan temple, PIB

पीएम मोदी ने फ्रांस के शहर पेरिस में भव्य BAPS स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन किया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यह भव्य स्वामीनारायण मंदिर भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। 

प्रधानमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही वे स्वयं इसमें उपस्थित न हों, फिर भी वे इस आयोजन से भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़े हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मन से और हृदय से, वह स्वयं को लोगों के बीच ही होने का अनुभव कर रहे हैं।

परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू किए गए उनके दूरदर्शी अभियान को याद किया। उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे इस वैश्विक मिशन ने वर्षों में अपार प्रगति हासिल की है। पीएम मोदी ने कहा कि आज उस पुनर्जागरण का प्रकाश यूरोप सहित पूरे विश्व में फैल रहा है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं...साल 2024 में अबू धाबी में एक शानदार मंदिर का उद्घाटन किया गया। आज हज़ारों लोग वहाँ पूजा-अर्चना करने जाते हैं। और अब, पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण, सृजन की निरंतरता ये संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है मैं इस कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं। इस अवसर पर मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था और करोड़ों भक्तों को दिल से बधाई देता हूँ।”

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अलग-अलग देशों में मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा से भारत की प्राचीन विचारधारा और मानवीय मूल्य भी पहुँचते हैं

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "BAPS के ज़रिए जब अलग-अलग देशों में मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा होती है, तो उनके साथ भारत की प्राचीन विचारधारा और मानवीय मूल्य भी पहुँचते हैं। भारत की विचारधारा कहता है, 'समानं मनः सहचित्तमेषाम्', जिसका अर्थ है कि हमारे मन समान हो और हमारे हृदय साथ जुड़े इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है ये फ्रांस की विविधता को समृद्ध करेगा ही, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी। बीते वर्षों में, भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। मेरे मित्र राष्ट्रपति मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बना रहे हैं। टेक्नोलॉजी, AI और डिफेंस से लेकर स्पेस और क्लाइमेट एक्शन तक, हम नई गति और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को 'भारत और फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन के रूप में भी मना रहे हैं।"

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Published By:
 Kritarth Sardana
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