Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ से PM मोदी का है पुराना अटूट नाता, हर साल यात्रा शुरू होने से पहले दिल्ली से भेजते हैं ये खास प्रसाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी संस्कृति और आस्था को लेकर हमेशा समर्पित रहते हैं। 12 साल से अधिक समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने भगवान जगन्नाथ के प्रति जो अटूट श्रद्धा दिखाई, उसे देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद भी लगातार निभा रहे हैं। इसी कड़ी में, 149वीं जगन्नाथ रथयात्रा के पावन अवसर पर पीएम मोदी ने दिल्ली से भगवान जगन्नाथ के लिए विशेष भोग भिजवाया है।

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pm-narendra-modi-not-forget-lord-jagannath-send-special-prasad-from-delhi-ahead-of-149th-ahmedabad-rath-yatra-know-special-connection | Image: Social Media

भगवान जगन्नाथ के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आस्था जगजाहिर है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक, उनके जीवन में महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति समर्पण हमेशा अटूट रहा है। समय बदला, उनकी जिम्मेदारियां और व्यस्तताएं बढ़ीं, लेकिन भगवान जगन्नाथ के प्रति उनका सेवा भाव आज भी वैसा ही है।

आज भी कायम है विशेष प्रसाद भेजने की परंपरा

पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भगवान जगन्नाथ रथयात्रा से ठीक एक दिन पहले मंदिर में विशेष प्रसाद भेजने की एक अनूठी परंपरा शुरू की थी। इस प्रसाद में ऋतु के अनुसार अंकुरित मूंग, जामुन, आम और सूखे खजूर ड्राई फ्रूट्स शामिल होते हैं। दिल्ली आने के बाद भी पीएम मोदी ने इस नियम को टूटने नहीं दिया। वे हर साल आज भी नियमपूर्वक दिल्ली से यह विशेष प्रसाद अहमदाबाद के जमालपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर भेजते हैं। इस वर्ष भी महाप्रभु की रथयात्रा के अवसर पर उनका भेजा हुआ प्रसाद विशेष रूप से सजाए गए डिब्बों में मंदिर पहुंचाया गया।

पहिंग विधि का अनोखा रिकॉर्ड

गुजरात की परंपरा के अनुसार, रथयात्रा की शुरुआत राज्य के सर्वोच्च पद पर प्रथम सेवक द्वारा 'पहिंग विधि' से होती है। इस रस्म में सोने की झाड़ू से भगवान के रथ का मार्ग साफ किया जाता है। नरेंद्र मोदी के नाम गुजरात के इतिहास में सबसे अधिक बार पहिंग विधि करने का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री लगातार 13 बार इस पावन अनुष्ठान को पूरा किया। वे न केवल यह विधि करते थे, बल्कि जमालपुर के 400 साल पुराने ऐतिहासिक मंदिर के प्रांगण में खुद रथ खींचकर यात्रा का शुभारंभ करते थे।

रथयात्रा को दी भव्यता और सुरक्षा की गारंटी

साल 2001 से पहले अहमदाबाद की रथयात्रा अक्सर सांप्रदायिक तनाव या संवेदनशील माहौल से घिरी रहती थी। नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री बनते ही कड़े प्रशासनिक और सुरक्षा इंतजामों के जरिए इस उत्सव को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाया। उन्होंने देश में पहली बार रथयात्रा की सुरक्षा के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी कैमरे और हाई-टेक कंट्रोल रूम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शुरू कराया। सुरक्षा के इसी मजबूत मॉडल के कारण लाखों श्रद्धालु बिना किसी भय के इस यात्रा में शामिल होने लगे। आज भी इस यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद रहती है कि मुख्यमंत्री और डीजीपी खुद इसकी निगरानी करते हैं और हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए जाते हैं।

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वैश्विक पहचान और सांस्कृतिक गौरव

नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अहमदाबाद की रथयात्रा को ओडिशा की पुरी रथयात्रा के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी और भव्य रथयात्रा के रूप में वैश्विक पहचान मिली। उन्होंने देश भर से आने वाले साधु-संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष नागरिक सुविधाओं और सरकारी तालमेल की व्यवस्था की। 

इस पावन अवसर पर पीएम मोदी ने देशवासियों को बधाई देते हुए इसे भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया है। उन्होंने कामना की कि महाप्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।

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Published By:
 Aarya Pandey
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