अपडेटेड 5 January 2026 at 10:32 IST

'सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी, इसे मिटाने की मानसिकता...,' मंदिर पर हमले के 1000 साल पूरे होने पर PM मोदी का लेख

पीएम मोदी ने महमूद गजनवी के द्वारा गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर किए गए हमले के 1000 साल पूरे होने पर लेख लिखा है। पीएम ने अपने ब्लॉक में मंदिर पर हमले और इसके पुनर्निर्माण से जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र किया है।

PM Modi
सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1000 साल पूरे होने पर PM मोदी का लेख | Image: @narendramodi

गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के एक हजार साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक लेख लिखा है। अपने लेख में पीएम मोदी ने महमूद गजनवी के हमले को इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी बताई है। इस लेख में पीएम ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि मंदिर के पुनर्निर्माण से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू खुश नहीं थे।

पीएम मोदी ने अपने लेख में लिखा है, जय सोमनाथ! वर्ष 2026 में आस्था की हमारी तीर्थस्थली सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है! सोमनाथ दरअसल भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है, जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सदैव सर्वोपरि रही है।

हमारी आध्यात्मिक विरासत अनगिनत हमलों की साक्षी-PM मोदी

पीएम मोदी ने आगे लिखा है-हमारी महान संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत अनगिनत हमलों की भी साक्षी रही है। यह देशवासियों की सामूहिक शक्ति ही है, जिसने हमारी सांस्कृतिक धरोहर को हमेशा अक्षुण्ण रखा है।

वनानि दहतो वह्नेः सखा भवति मारुतः।

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स एव दीपनाशाय कृशे कस्यास्ति सौहृदम् ।

पीएम मोदी ने की सरदार पटेल की तारीफ

पीएम मोदी ने मंदिर के पुनर्निर्माण के बारे में बताते हुए अपने लेख में लिखा है, ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

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नेहरू पर लगाया पीएम ने गंभीर आरोप

पीएम मोदी ने आगे लिखा, उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था।तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।

महमूद गजनवी ने कब किया था मंदिपर हमला?

बता दें कि महमूद गजनवी ने जनवरी 1026 में सोमवार मंदिर पर पहली बार हमला किया था। पीएम मोदी ने इस घटना के 1000 साल पूरे होने पर खास लेख लिखा है।  इसमें उन्होंने इसे केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक बताया है। 
 

Note: प्रधानमंत्री ने पूरा लेख अपने ब्लॉक में लिखा है- आप इस लिंक पर क्लिक कर पूरा लेख पढ़ सकते हैं

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 5 January 2026 at 10:00 IST