अपडेटेड 25 January 2026 at 13:22 IST

Mann Ki Baat: भजन क्लबिंग, र्स्‍टाटअप और इंडस्‍ट्री...पीएम मोदी ने मन की बात में किस-किस चीज का किया जिक्र, यहां जानिए सबकुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 130वां एपिसोड रविवार 25 जनवरी को प्रसारित हुआ। यह 2026 में पीएम मोदी के 'मन की बात' प्रोग्राम का पहला एपिसोड था।

Mann ki baat
Mann ki baat | Image: X

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 130वां एपिसोड रविवार 25 जनवरी को प्रसारित हुआ। यह 2026 में पीएम मोदी के 'मन की बात' प्रोग्राम का पहला एपिसोड था। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत 'नेशनल वोटर्स डे' का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि 'मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है'। पीएम मोदी ने कहा, साल 2026 का यह पहला ‘मन की बात’ है। कल 26 जनवरी को हम सभी ‘गणतंत्र दिवस’ का पर्व मनाएंगे। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी का ये दिन हमें अपने संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है। आज 25 जनवरी का दिन भी बहुत अहम है। आज ‘National Voters’ Day’ है ‘मतदाता दिवस’ है। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है।

उन्‍होंने कहा, आमतौर पर जब कोई 18 साल का हो जाता है, मतदाता बन जाता है तो उसे जीवन का एक सामान्य पड़ाव समझा जाता है। लेकिन, दरअसल ये अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बहुत बड़ा माइलस्‍टोन होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम देश में वोटर बनने का, मतदाता बनने का, उत्सव मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसे सेलीब्रेट करते हैं, ठीक वैसे ही, जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गांव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयां बांटी जाएं। इससे लोगों में वोटिंग के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसके साथ ही यह भावना और सशक्त होगी कि एक वोटर होना कितना मायने रखता है।

भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा- पीएम मोदी

देश में जो भी लोग चुनावी प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं, जो हमारे लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर काम करते हैं, मैं उन सभी की बहुत सराहना करना चाहूंगा। आज ‘मतदाता दिवस’ पर मैं अपने युवा साथियों से फिर आग्रह करूंगा कि वे 18 साल का होने पर voter के रूप में खुद को जरूर register करें। संविधान ने हर नागरिक से जिस कर्त्तव्य भावना के पालन की अपेक्षा रखी है इससे वो अपेक्षा भी पूरी होगी और भारत का लोकतंत्र भी मजबूत होगा।

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उन्‍होंने कहा, इन दिनों मैं सोशल मीडिया पर एक interesting trend देख रहा हूं। लोग साल 2016 की अपनी यादों को फिर से ताजा कर रहे हैं। उसी भावना के साथ, आज मैं भी आपके साथ अपनी एक मेमोरी को शेयर करना चाहता हूं। दस साल पहले, जनवरी 2016 में हमने एक ambitious journey की शुरुआत की थी। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो ये, लेकिन ये युवा-पीढ़ी के लिए, देश के future के लिये, काफी अहम है। तब कुछ लोग ये समझ ही नहीं पाए थे कि ये आखिर है क्या ? साथियो, मैं जिस journey की बात कर रहा हूँ, वह है start-up India की journey। इस अद्भुत journey के heroes हमारे युवा साथी हैं। अपने comfort zone से बाहर निकलकर उन्होंने जो innovation किए, वो इतिहास में दर्ज हो रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा start-ups ecosystem बन चुका है। ये start-ups लीक से हट के हैं। आज, वे, ऐसे sectors में काम कर रहे हैं, जिनके बारे में 10 साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। AI, Space, Nuclear Energy, Semi Conductors, Mobility, Green Hydrogen, Biotechnology आप नाम लीजिए और कोई न कोई भारतीय Start-up उस sector में काम करते हुए दिख जाएगा। मैं अपने उन सभी युवा-साथियों को salute करता हूँ जो किसी-न-किसी Start-up से जुड़े हैं या फिर अपना Start-up शुरू करना चाहते हैं|

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पीएम ने कहा, आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं देशवासियों, विशेषकर industry और Start-up से जुड़े युवाओं से एक आग्रह जरूर करना चाहता हूँ। भारत की economy तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वो जिम्मेदारी है – quality पर जोर देने की। होती है, चलती है, चल जाएगा, यह युग चला गया। आइए इस वर्ष हम पूरी ताकत से quality को प्राथमिकता दें। हम सबका एक ही मंत्र हो quality, quality और सिर्फ quality. कल से आज बेहतर quality। हम जो भी manufacture कर रहे हैं, उसकी quality को बेहतर बनाने का संकल्प लें। चाहे हमारे textiles हों, technology हो या फिर electronics even packaging, Indian product का मतलब ही बन जाए – Top quality. आइए, excellence को हम अपना bench mark बनाएं। हम संकल्प लें quality में ना कोई कमी होगी, ना quality से कोई समझौता होगा और मैंने तो लाल किले से कहा था ‘Zero defect – Zero effect’। ऐसा करके ही हम विकसित भारत की यात्रा को तेजी से आगे ले जा पाएंगे।

'तमसा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक'

पीएम मोदी ने कहा, हमारे देश के लोग बहुत innovative हैं। समस्याओं का समाधान ढूँढना हमारे देशवासियों के स्वभाव में है। कुछ लोग ये काम start-ups के जरिये करते हैं, तो कुछ लोग समाज की सामूहिक शक्ति से रास्ता निकालने का प्रयास करते हैं। ऐसा ही एक प्रयास उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सामने आया है। यहाँ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। तमसा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सजीव धारा है।

अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जन-जीवन की धुरी हुआ करती थी, लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी।  गाद, कूड़ा-कचरा और गंदगी ने इस नदी के प्रवाह को रोक दिया था। इसके बाद यहाँ के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की गई और उसके किनारों पर छायादार, फलदार पेड़ लगाए गए। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस काम में जुटे और सबके प्रयास से नदी का पुनरुद्धार हो गया।

जन-भागीदारी का ऐसा ही प्रयास आंध्र-प्रदेश के अनंतपुर में भी देखने को मिला है। यह वह क्षेत्र है जो सूखे की गम्भीर समस्या से जूझता रहा है। यहाँ की मिट्टी, लाल और बलुई है। यही वजह है कि लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। यहां के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है। कई बार तो लोग अनंतपुर की तुलना रेगिस्तान में सूखे की स्थिति से भी कर देते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, इस समस्या के समाधान के लिये स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। फिर प्रशासन के सहयोग से यहां ‘अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट’ इसकी शुरुआत हुई। इस प्रयास के तहत 10 से अधिक जलाशयों को जीवन दान मिला है। उन जलाशयों में अब पानी भरने लगा है। इसके साथ ही 7000 से अधिक पेड़ भी लगाए गए हैं। यानि अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ-साथ green cover भी बढ़ा है। यहाँ बच्चे अब तैराकी का आनंद भी ले सकते हैं। एक प्रकार से कहें तो यहाँ का पूरा ecosystem फिर से निखर उठा है। आजमगढ़ हो, अनंतपुर हो, या फिर देश की कोई और जगह, ये देखकर खुशी होती है कि लोग एकजुट होकर कर्तव्य भाव से बड़े संकल्प सिद्ध कर रहे हैं। जन-भागीदारी और सामूहिकता की यही भावना हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।

भजन clubbing’ Genz के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा

पीएम मोदी ने कहा, हमारे देश में भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा रहे हैं। हमने मंदिरों में भजन सुने हैं, कथा सुनते वक्त सुने हैं और हर दौर ने भक्ति को अपने समय के हिसाब से जिया है। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और अपनी जीवन-शैली में ढाल दिया है। इसी सोच से एक नया सांस्कृतिक चलन उभरकर सामने आया है। आपने social media पर ऐसे video जरूर देखे होंगे। देश के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हो रहे हैं।

मंच सजा होता है, रोशनी होती है, संगीत होता है, पूरा ताम-झाम होता है और माहौल किसी concert से जरा भी कम नहीं होता है। ऐसा ही लग रहा है कि जैसे कोई बहुत बड़ा concert हो रहा है, लेकिन वहाँ जो गाया जा रहा होता है वो पूरी तन्मयता के साथ, पूरी लगन के साथ, पूरी लय के साथ भजन की गूंज। इस चलन को आज ‘भजन clubbing’ कहा जा रहा है और यह खासतौर पर Genz के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। ना शब्दों की मर्यादा टूटती है और ना ही भाव की। मंच आधुनिक हो सकता है, संगीत की प्रस्तुति अलग हो सकती है, लेकिन मूल भावना वही रहती है। अध्यात्म का एक निरंतर प्रवाह वहाँ अनुभव होता है।

Drugs के खतरों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी

पीएम मोदी ने कहा, भारत की परिवार व्यवस्था- Family System हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। दुनिया के कई देशों में इसे बहुत कौतूहल के  साथ देखा जाता है। कई देशों में ऐसे family system को लेकर बहुत सम्मान का भाव है। कुछ ही दिन पहले ही मेरे Brother U.A.E.  के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत आए थे। उन्होंने मुझे बताया कि U.A.E. साल 2026 को year of family के रूप में मना रहा है। मकसद ये कि वहाँ के लोगों के बीच सौहार्द और सामुदायिक भावना और मजबूत हो, वाकई ये बहुत ही सराहनीय पहल है।

पीएम मोदी ने कहा, जब परिवार और समाज की ताकत मिलती है, तो हम बड़ी-से-बड़ी चुनौतियों को परास्त कर सकते हैं। मुझे अनंतनाग के शेखगुन्ड गाँव के बारे में जानकारी मिली है। यहां drugs, तंबाकू, सिगरेट और शराब से जुड़ी चुनौतियाँ काफी बढ़ गई थी। इन सबको देखकर यहां के मीर जाफ़र जी इतना परेशान हुए कि उन्होंने इस समस्या को दूर करने की ठान ली। उन्होंने गाँव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को एकजुट किया। उनकी इस पहल का असर कुछ ऐसा रहा कि वहाँ की दुकानों ने तंबाकू उत्पादों को बेचना ही बंद कर दिया। इस प्रयास से Drugs के खतरों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है।

उन्‍होंने कहा, हमारे देश में ऐसी अनेक संस्थाएं भी हैं, जो वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटी हैं। जैसे एक संस्था है पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर के फरीदपुर में। इसका नाम है ‘विवेकानंद लोक शिक्षा निकेतन’। ये संस्था पिछले चार दशक से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में जुटी है। गुरुकुल पद्धति की शिक्षा और teachers की training के साथ ही यह संस्था समाज कल्याण के कई नेक कार्यों में जुटी है। मेरी कामना है कि निस्वार्थ सेवा का यह भाव देशवासियों के बीच निरंतर और अधिक सशक्त होता रहे।

पीएम मोदी ने कहा, ‘मन की बात’ में हम निरंतर स्वच्छता के विषय को उठाते रहे हैं। मुझे ये देखकर गर्व होता है हमारे युवा अपने आसपास की स्वच्छता को लेकर बहुत सजग हैं। अरुणाचल प्रदेश में हुए एक ऐसे ही अनूठे प्रयास के बारे में मुझे जानकारी मिली है। अरुणाचल वो धरती है जहां देश में सबसे पहले सूर्य की किरणें पहुँचती है। यहां लोग ‘जय हिन्द’ कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं।

उन्‍होंने कहा, यहां ईटानगर में युवाओं का समूह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी। इन युवाओं ने अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई को अपना mission बना लिया। इसके बाद ईटानगर, नाहरलागुन, दोईमुख, सेप्पा, पालिन और पासीघाट वहाँ भी ये अभियान चलाया गया। ये युवा अब तक करीब 11 लाख किलो से अधिक कचरे की सफाई कर चुके हैं। सोचिए दोस्तो, नौजवानों ने मिलकर के 11 लाख किलो कूड़ा-कचरा हटाया।

एक और उदाहरण असम का है। असम के नागांव में वहाँ की पुरानी गलियों से लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हैं यहां कुछ लोगों ने अपनी गलियों को मिलकर साफ करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उनके साथ और लोग जुडते गए। इस तरह एक ऐसी टीम तैयार हो गई, जिसने गलियों से बहुत सारा कचरा हटा दिया। साथियो, ऐसा ही एक प्रयास बेंगलुरु में हो रहा है। बेंगलुरु में sofa waste एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है इसलिए कुछ professionals एकजुट होकर इस issue को अपने तरीके से solve कर रहे हैं।

'छोटी-छोटी कोशिशों से भी बड़े बदलाव आते हैं'

पीएम मोदी ने कहा, आज कई शहरों में ऐसी टीमें हैं, जो landfill waste की recycling में जुटी हैं। चेन्नई में ऐसी ही एक team ने बहुत बेहतरीन काम किया है। ऐसे उदाहरणों से पता चलता है कि स्वच्छता से जुड़ा हर प्रयास कितना अहम है। हमें स्वच्छता के लिए व्यक्तिगत तौर पर या फिर टीम के तौर पर अपने प्रयास बढ़ाने होंगे, तभी हमारे शहर और बेहतर बनेंगे। जब पर्यावरण सरंक्षण की बात होती है, तो अक्सर हमारे मन में बड़ी योजनाएं, बड़े अभियान और बड़े-बड़े संगठन की बातें आती हैं। लेकिन कई बार बदलाव की शुरुआत बहुत साधारण तरीके से होती है। एक व्यक्ति से, एक इलाके से, एक कदम से और लगातार की गई छोटी-छोटी कोशिशों से भी बड़े बदलाव आते हैं।

उन्‍होंने कहा, पश्चिम बंगाल के कूच बिहार के रहने वाले बेनॉय दास जी का प्रयास  इसी का उदाहरण है । पिछले कई वर्षों से उन्होंने अपने जिले को हरा-भरा बनाने का काम अकेले दम पर किया है । बेनॉय दास जी ने हजारों पेड़ लगाए हैं । कई बार पौधे खरीदने से लेकर उन्हें लगाने और देख-भाल करने का सारा खर्च खुद ने उठाया है । जहां जरूरत पड़ी, वहाँ स्थानीय लोगों, छात्रों और नगर निकायों के साथ मिलकर काम किया । उनके प्रयासों से सड़कों के किनारे हरियाली और बढ़ गई है ।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 25 January 2026 at 13:22 IST