Kacche kele ke chilke ki Chutney Recipe: दादी-नानी के नुस्खों वाली कच्चे केले के छिलकों की बनाएं चटनी, सिर्फ 5 मिनट में तैयार; बनाना भी आसान
Kacche kele ke chilke ki Chutney Recipe: आज के समय में हम अक्सर फल और सब्जियों के छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन दादी-नानी के नुस्खों में इन्हीं छिलकों में सेहत और स्वाद का खजाना छिपा होता है। ऐसी ही एक लाजवाब रेसिपी है 'कच्चे केले के छिलकों की चटनी'। यह न केवल स्वाद में बेमिसाल है, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर है। आइए जानते हैं कि कच्चे केले के छिलके की चटनी कैसे बनाएं?
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Kacche kele ke chilke ki Chutney Recipe: अक्सर हम रसोई में सब्जियां बनाते समय उनके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद और हमारी दादी-नानी के नुस्खों में इन छिलकों को 'अमृत' के समान माना गया है? कच्चे केले की सब्जी तो हम सभी बड़े चाव से खाते हैं, पर इसके छिलके पोषक तत्वों का असली पावरहाउस हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कच्चे केले के छिलके की झटपट बनने वाली चटनी, जो न केवल स्वाद में बेमिसाल है, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी वरदान है। आइए जानते हैं कच्चे केले की चटनी कैसे बनाएं और क्या-क्या सामग्री लगेगा?
केले की चटनी के लिए सामग्री
कच्चे केले के छिलके
हरी मिर्च
लहसुन की कलियां
अदरक
ताजा हरा धनिया
नींबू का रस
नमक
सरसों का तेल
तड़के के लिए राई, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ता
केले की चटनी कैसे बनाएं?
सबसे पहले कच्चे केले के छिलकों को अच्छी तरह धो लें। अब इन्हें थोड़ा सा नमक डालकर कुकर में 1-2 सीटी आने तक उबाल लें। उबालने से छिलकों का कसैलापन दूर हो जाता है और वे नरम हो जाते हैं।
उबले हुए छिलकों को ठंडा होने दें। अब एक ब्लेंडर या मिक्सी जार में छिलके, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक, हरा धनिया और थोड़ा सा नमक डालें।
इसे दरदरा या बारीक (जैसा आप पसंद करें) पीस लें। पीसते समय जरूरत हो तो एक-दो चम्मच पानी डाल सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि चटनी ज्यादा पतली न हो।
पिसी हुई चटनी को एक बाउल में निकालें। इसमें ऊपर से नींबू का रस और एक चम्मच कच्चा सरसों तेल मिलाएं। यदि आप और ज्यादा स्वाद चाहते हैं, तो एक पैन में थोड़ा तेल गरम कर उसमें राई और करी पत्ता डालकर तड़का लगाएं और चटनी पर डाल दें।
केले की चटनी खाने के फायदे
कच्चे केले के छिलके फाइबर, विटामिन B6, B12 और पोटेशियम से भरपूर होते हैं। यह पाचन को दुरुस्त रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। पुराने समय में जब संसाधनों की कमी थी, तब बुजुर्ग 'जीरो वेस्ट कुकिंग' (Zero Waste Cooking) का पालन करते थे, जिससे स्वाद और सेहत दोनों बने रहते थे।