हार्ट अटैक आने के क्या हैं संकेत? अगर नाना पाटेकर की तरह अचानक पड़े दिल का दौरा तो तुरंत क्या करें; जानें एक्सपर्ट्स की राय

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक कार्डियक अरेस्ट से निधन की खबर के बाद हृदय स्वास्थ्य पर फिर चर्चा तेज हो गई है। दिल का दौरा या कार्डियक अरेस्ट आने पर तुरंत सही कदम उठाना जान बचा सकता है। आइए एक्सपर्ट्स की राय जानते हैं।

हार्ट अटैक आने के क्या हैं संकेत? अगर नाना पाटेकर की तरह अचानक पड़े दिल का दौरा तो तुरंत क्या करें; जानें एक्सपर्ट्स की राय
हार्ट अटैक आने के क्या हैं संकेत? अगर नाना पाटेकर की तरह अचानक पड़े दिल का दौरा तो तुरंत क्या करें; जानें एक्सपर्ट्स की राय | Image: ANI

अचानक छाती में उठती तेज कसक, हाथों या जबड़े की ओर फैलता दर्द और अचानक आई बेसुध कर देने वाली घबराहट कभी भी और किसी के साथ भी सच हो सकता है। दिल का दौरा या कार्डियक अरेस्ट बिना किसी पूर्व चेतावनी के दस्तक देकर कुछ ही पलों में जिंदगी और मौत के बीच की लकीर खींच देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुरुषों और महिलाओं में इसके संकेत अलग हो सकते हैं?

 महिलाओं में अक्सर असामान्य थकान, उल्टी या पीठ दर्द जैसे छिपे हुए लक्षण देखने को मिलते हैं, जो कई बार गंभीर देरी का कारण बन जाते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि हार्ट अटैक के क्या संकेत होते हैं और क्या सिर्फ रात में ही आता है कार्डियक अरेस्ट?

हार्ट अटैक के क्या हैं संकेत? 

कार्डियक साइंसेज के डायरेक्टर डॉ. वैभव मिश्रा के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग हो सकते हैं। पुरूषों में आम लक्षण जैसे कि छाती में दबाव या तेज़ दर्द, दर्द का कंधे, हाथ या जबड़े तक फैलना, अत्यधिक पसीना आना और अचानक सांस फूलना। महिलाओं में लक्षण जैसे कि महिलाओं में छाती में दर्द के अलावा असामान्य थकान, जी मिचलाना, उल्टी, चक्कर आना, पीठ या जबड़े में दर्द और अपच जैसी बेचैनी होने की संभावना अधिक होती है। इन अलग लक्षणों के कारण कई बार बीमारी की पहचान में देरी हो जाती है।

क्या सिर्फ रात में ही आता है कार्डियक अरेस्ट?

ऐसा नहीं है कि कार्डियक अरेस्ट केवल रात में ही होता है; यह कभी भी आ सकता है। सोते समय या सुबह के समय शरीर के ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम, हार्मोन, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में होने वाले बदलावों के कारण इसका जोखिम बढ़ता है। स्लीप एपनिया, अतालता असामान्य धड़कन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी स्थितियां खतरे को बढ़ाती हैं।

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डॉ. वैभव मिश्रा  ने बताया हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर

डॉ. वैभव मिश्रा स्पष्ट करते हैं कि ये दोनों अलग स्थितियां हैं। 
हार्ट अटैक में जब दिल की मांसपेशियों तक खून का बहाव बाधित या बंद हो जाता है।
कार्डियक अरेस्ट में जब दिल अचानक इलेक्ट्रिकल रिदम में गड़बड़ी के कारण खून पंप करना बंद कर देता है। हालांकि, हार्ट अटैक आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।

अचानक दौरा पड़े तो तुरंत क्या करें?

यदि आपके सामने किसी को छाती में गंभीर बेचैनी हो, सांस फूले या वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़े।
बिना समय गंवाए तुरंत मेडिकल इमरजेंसी सर्विस को कॉल करें।
यदि पीड़ित व्यक्ति कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है या उसकी सांस असामान्य है, तो तुरंत सीपीआर (CPR) शुरू करें। यदि आसपास एईडी (AED - ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) उपलब्ध हो, तो उसका उपयोग करें।

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ब्रेन स्ट्रोक और कार्डियक अरेस्ट से बचाव 

फोर्टिस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक दिमाग में खून की सप्लाई रुकना या नस फटना और कार्डियक अरेस्ट दोनों अचानक होते हैं। इनके मुख्य जोखिम कारक हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग और मोटापा हैं।

बचाव के मुख्य उपाय जानें 

नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
संतुलित आहार लें, वजन नियंत्रित रखें और नियमित व्यायाम करें।
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण चेहरे का झुकना, हाथ में कमजोरी, बोलने में कठिनाई दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचे। आपात स्थिति में आपकी तुरंत की गई कार्रवाई किसी का जीवन बचा सकती है।

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Published By:
 Aarya Pandey
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