अपडेटेड 16 March 2026 at 16:50 IST
Viral Vs Bacterial Fever: वायरल और बैक्टीरियल बुखार में क्या हैं अंतर? जानें लक्षण और घरेलू इलाज
Viral Vs Bacterial Fever: बदलते मौसम के साथ बुखार होना एक आम समस्या है, लेकिन अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें वायरल फीवर है या बैक्टीरियल संक्रमण। इन दोनों के बीच के अंतर को समझना सही इलाज के लिए बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं।
- लाइफस्टाइल न्यूज़
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Viral Vs Bacterial Fever: बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण आजकल बुखार एक आम समस्या बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बुखार एक जैसा नहीं होता है? सामान्य तौर पर दिखने वाले बुखार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं पहला वायरल फीवर और दूसरा बैक्टिरियल फीवर। इन दोनों के बीच का अंतर समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इनका उपचार पूरी तरह से अलग होता है। आइए जानते हैं कि वायरल फीवर के लक्षण क्या है और घरेलू उपचार क्या कर सकते हैं?
वायरल और बैक्टीरियल बुखार में मुख्य अंतर क्या है?
वायरल बुखार वायरस के कारण होता है, जो हवा, दूषित पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। वहीं, बैक्टिरियल बुखार बैक्टीरिया के संक्रमण जैसे गले का संक्रमण या यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से होता है।
वायरल और बैक्टीरियल बुखार कितने दिन तक रहता है?
वायरल बुखार आमतौर पर 3 से 7 दिनों में अपने आप ठीक होने लगता है। वहीं बैक्टिरियल संक्रमण तब तक ठीक नहीं होता जब तक उसका उचित इलाज यानी कि न एंटीबायोटिक्स न दिया जाए।
एंटीबायोटिक्स का प्रभाव क्या होता है?
एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया पर काम करती हैं, वायरस पर नहीं। वायरल बुखार में एंटीबायोटिक्स लेना न केवल बेअसर है, बल्कि हानिकारक भी हो सकता है।
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Viral बुखार के लक्षण क्या हैं?
- तेज बुखार के साथ शरीर और जोड़ों में तेज दर्द।
- नाक बहना, गले में खराश और सूखी खांसी।
- आंखों में जलन
- त्वचा पर हल्के रैशेज होना।
- अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना।
Bacterial बुखार के लक्षण क्या हैं?
- बुखार का अचानक बहुत तेज हो जाना और पसीना आना।
- शरीर के किसी खास हिस्से में दर्द (जैसे टॉन्सिल में सूजन या कान में दर्द)।
- बुखार का लंबे समय तक बने रहना और दवाओं के बाद भी बार-बार आना।
- बलगम वाली खांसी या सांस लेने में कठिनाई।
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घरेलू उपचार क्या कर सकते हैं?
- तुलसी के पत्तों में एंटी-वायरल गुण होते हैं और अदरक संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। इनका काढ़ा बनाकर पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- बुखार में शरीर डिहाइड्रेटेड हो जाता है। इसलिए पानी, नारियल पानी, ताजे फलों का रस और सूप का सेवन अधिक करें।
- हल्दी में मौजूद 'करक्यूमिन' एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है। रात में गर्म हल्दी वाला दूध पीने से शरीर का दर्द कम होता है।
- लहसुन में 'एलिसिन' नामक तत्व होता है जो कीटाणुओं से लड़ने में सहायक है। इसे कच्चा या खाने में शामिल करके उपयोग करें।
- शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो पर्याप्त नींद और आराम से ही संभव है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधियां, तरीके और दावे अलग-अलग जानकारियों पर आधारित हैं। REPUBLIC BHARAT आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 16 March 2026 at 16:43 IST