कैंसर जैसी बीमारियों का पारंपरिक जड़ी-बूटियों से इलाज! 3 लाख मरीजों का इलाज कर चुकीं हैं 'जड़ी-बूटियों की रानी' पद्मश्री यानुंग जामोह
अरुणाचल प्रदेश की यानुंग जामोह लेगो को कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियों के इलाज में पारंपरिक जड़ी-बूटियों के योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने 3 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज किया है। वे सिर्फ दवाएं नहीं देतीं, बल्कि बीमारियों को जड़ से खत्म करने पर जोर देती हैं। उनके इलाज से हजारों लोगों को नई जिंदगी मिली है।
- लाइफस्टाइल न्यूज़
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कैंसर आजकल बहुत आम बीमारी बन गई है। यह शरीर की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि के कारण होती है। आम भारतीय घरों में जब तक इस बीमारी का पता चलता है, इलाज के लिए बहुत देर हो चुकी होती है। इसका आधुनिक इलाज बहुत महंगा भी है और अधिकतर केस में पीड़ित के बचने की उम्मीद ना के बराबर होती है।
एक पुरानी कहावत है "एलोपैथी घाव पर मरहम है, तो आयुर्वेद और हर्बल जड़ से इलाज है।" अरुणाचल प्रदेश की मशहूर हर्बल चिकित्सक यानुंग जामोह लेगो (Padma Shri Yanung Jamoh Lego) जड़ी-बूटियों और पारंपरिक चिकित्सा के मदद से कई दशकों से कैंसर, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी जानलेवा बीमारियों के इलाज कर रही हैं।
यानुंग जामोह लेगो को जड़ी-बूटियों की पारंपरिक चिकित्सा और खेती में उनके शानदार योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा 2024 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने 3 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज किया है। इनमें कैंसर के कई मरीज भी शामिल हैं। उन्होंने पिता से सीखी पारंपरिक जड़ी-बूटियों की मदद से मरीजों को राहत दी और कई मामलों में बीमारी को नियंत्रित करने या ठीक करने में सफलता पाई।
कौन हैं यानुंग जमोह लेगो?
यानुंग जामोह लेगो का जन्म 9 जुलाई 1963 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिका टोडे गांव में हुआ था। उनके पिता एक प्रसिद्ध लोक चिकित्सक थे। बचपन से ही उन्होंने पिता से जड़ी-बूटियों का इलाज सीखा।
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उन्होंने असम कृषि विश्वविद्यालय से कृषि की पढ़ाई की। 1988 में अरुणाचल प्रदेश सरकार के कृषि विभाग में नौकरी शुरू की और 2023 में रिटायर हुईं। लेकिन उनका असली जुनून हमेशा हर्बल मेडिसिन रहा। पिता के साथ 15 साल तक ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने जड़ी-बूटियों से लोगों का इलाज शुरू कर दिया।
लाखों लोगों की जान बचाई
यानुंग ने अब तक 3 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज किया है। इनमें कैंसर, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। वे सिर्फ दवाएं नहीं देतीं, बल्कि बीमारियों को जड़ से खत्म करने पर जोर देती हैं। उनके इलाज से हजारों लोगों को नई जिंदगी मिली है।
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कैंसर के मरीजों को पहुंचाई मदद
यानुंग जामोह लेगो ने स्थानीय जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके कैंसर जैसे गंभीर रोगों में मरीजों को मदद पहुंचाई। उनके इलाज का आधार उनकी पीढ़ियों पुरानी पारंपरिक ज्ञान और अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक जड़ी-बूटियां हैं। उन्होंने न सिर्फ इलाज किया, बल्कि बीमारी को रोकने के लिए भी लोगों को जागरूक किया। उनके मुताबिक, सही जड़ी-बूटियों के नियमित इस्तेमाल और स्वस्थ जीवनशैली से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जो कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मददगार हो सकती है।
कैंसर जैसी बीमारियों में आधुनिक दवाइयां बहुत जरूरी हैं, लेकिन पारंपरिक जड़ी-बूटियां भी सहायक भूमिका निभा सकती हैं। लेगो ने ये बताया है कि हमारे पूर्वजों का ज्ञान आज भी कितना मूल्यवान है।
2009 में शुरू की खास संस्था
2009 में उन्होंने "Indigenous Herbal Heritage" नाम से एक संस्था बनाई। इस संस्था का मकसद औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना और लोगों को हर्बल मेडिसिन के बारे में जागरूक करना है। अब तक 1 लाख से ज्यादा लोगों को हर्बल दवाओं के फायदे बताए जा चुके हैं। हर साल करीब 5,000 औषधीय पौधे लगाए जाते हैं ताकि ये जड़ी-बूटियां हमेशा उपलब्ध रहें।
पहले भी मिल चुके हैं कई पुरस्कार
2024 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले 2019 में अरुणाचल प्रदेश राज्य पुरस्कार, 2007 में सृष्टि सम्मान पुरस्कार और 2013 में पारंपरिक वैद्य रत्न पुरस्कार मिल चुका है।
पद्म श्री पुरस्कार उनके दशकों के मेहनत और समर्पण को मान्यता देता है। यह बताता है कि हमारे देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आज भी कितनी उपयोगी और प्रभावशाली है। यानुंग जामोह लेगो हमें सिखाती है कि पुराने ज्ञान को आधुनिक तरीके से अपनाकर हम बहुत कुछ कर सकते हैं। वे न सिर्फ इलाज करती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए औषधीय पौधों को बचाने का भी काम कर रही हैं।
अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियां प्राकृतिक हैं और कई बीमारियों में फायदेमंद साबित हुई हैं। इनका इस्तेमाल सही तरीके से और अनुभवी व्यक्ति की देखरेख में करना चाहिए। अगर आप या आपके परिवार में कोई कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहा है, तो डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा के बारे में भी जानकारी लें। लेकिन याद रखें- कोई भी इलाज बिना विशेषज्ञ की देखरेख के न शुरू करें।