अपडेटेड 19 February 2026 at 08:43 IST

Gas Burner Tips: गैस की बदलती लौ का रंग दे रहा है जानलेवा बीमारियों को न्योता, तुरंत हो जाएं सावधान! सेहत को हो सकता है नुकसान

Gas Stove Flame Colour: गैस बर्नर की लौ का रंग सिर्फ देखने की बात नहीं है, बल्कि यह आपकी सेहत से जुड़ा अहम संकेत है। समय रहते सावधानी बरतकर आप खुद को और अपने परिवार को गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

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गैस बर्नर स्टोव कलर | Image: AI

How To Clean Gas Stove Burner At Home:  घर में रोजाना खाना बनाने के लिए गैस चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आपके गैस बर्नर की लौ का रंग बदल गया है? अगर गैस की लौ नीले रंग की बजाय पीली, नारंगी या लाल हो रही है, तो यह सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है।

गैस की लौ का सही रंग क्या होता है?

आमतौर पर गैस की लौ नीले रंग की होती है। इसका मतलब होता है कि गैस सही तरीके से जल रही है और ऑक्सीजन की मात्रा भी पर्याप्त है। नीली लौ होने पर खाना जल्दी पकता है और धुआं भी नहीं निकलता है।

नीली लौ का क्या मतलब है?

Lpgjets के मुताबिक, जब आपके गैस चूल्हे से नीली लौ निकलती है, तो इसका मतलब होता है कि गैस और चूल्हा दोनों सही तरीके से काम कर रहे हैं। नीला रंग इस बात का संकेत है कि गैस और हवा का मिश्रण बिल्कुल संतुलित है। इस लौ का तापमान बहुत ज्यादा होता है, करीब 1960 से 1980 डिग्री सेल्सियस, जिससे खाना जल्दी पकता है और गैस की बचत भी होती है। इसके अलावा, नीली लौ यह भी बताती है कि बर्नर के छेद साफ हैं और कहीं कोई रुकावट नहीं है।

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पीली लौ का क्या मतलब है?

अगर गैस चूल्हे से पीली या नारंगी लौ निकल रही है, तो यह चेतावनी का संकेत है और तुरंत ध्यान देने की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि गैस को जलने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। पीली लौ का तापमान कम होता है, करीब 1000 डिग्री सेल्सियस, इसलिए खाना देर से पकता है और गैस ज्यादा खर्च होती है। साथ ही, इससे कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस निकल सकती है, जो बंद रसोई में सेहत के लिए खतरनाक होती है। इसी वजह से कई बार बर्तन नीचे से काले पड़ जाते हैं, क्योंकि अधजली गैस कालिख बनकर जम जाती है। इसका मुख्य कारण बर्नर के छेदों में गंदगी या खाने के कण फंसना होता है। अगर समय रहते इसे साफ न किया जाए, तो गैस सिलेंडर जल्दी खत्म होने लगता है और खर्च भी बढ़ जाता है।

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अगर आपके गैस चूल्हे की लौ पीली या नारंगी हो रही है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे बर्नर में गंदगी या कालिख जम जाना। इसके अलावा गैस का सही तरीके से न जलना या हवा और गैस का सही अनुपात न होना। साथ ही, बर्नर के छिद्र बंद होना भी गैस के बदलते रंग का कारण हो सकते हैं। इस स्थिति में गैस पूरी तरह नहीं जलती है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस बन सकती है।

सेहत को कैसे पहुंचता है नुकसान?

पीली या नारंगी लौ से निकलने वाला धुआं और जहरीली गैस आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। इससे सिरदर्द और चक्कर आना, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, मतली और उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय में फेफड़ों और दिल से जुड़ी समस्याएं जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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किन बातों का रखें खास ध्यान?

  • गैस बर्नर की नियमित सफाई करें।
  • बर्नर के छिद्रों में जमी गंदगी को समय-समय पर साफ करें।
  • अगर लौ का रंग लगातार पीला या नारंगी रहे, तो तुरंत गैस सर्विस टेक्नीशियन को बुलाएं।
  • रसोईघर में हवादार माहौल रखें, ताकि धुआं बाहर निकल सके।
  • गैस चूल्हा जलाते समय खिड़की या एग्जॉस्ट फैन जरूर चलाएं।

अगर घर के किसी सदस्य को बार-बार सिरदर्द, थकान, सांस लेने में परेशानी या चक्कर आने जैसी शिकायत हो, तो तुरंत गैस चूल्हे की जांच कराएं। यह कार्बन मोनोऑक्साइड गैस लीकेज का संकेत हो सकता है। गैस बर्नर की लौ का रंग सिर्फ देखने की बात नहीं है, बल्कि यह आपकी सेहत से जुड़ा अहम संकेत है। अगर लौ नीली नहीं है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते सावधानी बरतकर आप खुद को और अपने परिवार को गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधियां, तरीके और दावे अलग-अलग जानकारियों पर आधारित हैं।  REPUBLIC BHARAT आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 19 February 2026 at 08:43 IST