Love Bite: कब जानलेवा हो जाती है लव बाइट, किस समय पार्टनर को रोकना हो जाता है बेहद जरूरी? जानिए सब कुछ
लव बाइट (Love Bite या Hickey) के बारे में तो हर कोई जानता होगा। आजकल कपल के बीच प्यार जाहिर करने का आसान तरीका बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इजहार में बना एक छोटा-सा निशान आपकी जान का दुश्मन बन सकता है?
- लाइफस्टाइल न्यूज़
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लव बाइट (Love Bite या Hickey) के बारे में तो हर कोई जानता होगा। आजकल कपल के बीच प्यार जाहिर करने का आसान तरीका बन गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इजहार में बना एक छोटा-सा निशान आपकी जान का दुश्मन बन सकता है? यह पढ़कर शायद आपको हैरानी हो, लेकिन हकीकत से मुंह मोड़ने में जरा भी समझदारी की बात नहीं है।
तो आईए सबसे पहले बताते हैं लव बाइट होता क्या है और कैसे बनता है। लव बाइट वह निशान है जो किसी के होंठों से त्वचा पर लंबे समय तक चूसने या दबाने से बनता है। यह त्वचा के नीचे की छोटी नसों के टूटने और खून के जमाव से लाल-गहरा दाग बनाकर दिखता है। आमतौर पर यह मामूली घाव होता है जो कुछ दिनों से हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है।
कब यह लव बाइट है सामान्य और कब है खतरा?
छोटे हिक्की सामान्य होते हैं, दर्द हल्का होता है और रंग कुछ दिनों में फीका पड़ जाता है। अधिकतर मामलों में किसी तरह का दीर्घकालिक खतरा नहीं होता। लेकिन जब निशान बहुत गहरे या बैंगनी-नीले रंग के हों तो सावधान हो जाना चाहिए। निशान के आसपास सूजन बहुत ज्यादा हो। या फिर चक्कर आने लगे, सिरदर्द या शरीर के किसी हिस्से में झुनझुनी/सूनापन, बोलचाल में परेशानी या किसी भी तरह की अचानक दुर्बलता महसूस हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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लव बाइट से कैसे जान पर खतरा
गर्दन पर ज्यादा दबाव: गर्दन में कैरोटिड आर्टरी जैसी प्रमुख धमनियां होती हैं। बहुत जोर से और लंबा समय चूसने या दबाने से इन धमनियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
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धमनी की क्षति या फटना: दुर्लभ लेकिन संभव है कि अंदर की किसी धमनियां या नसें फट जाएं। इससे खून का थक्का बन सकता है या खून के भीतरी दबाव में परिवर्तन आ सकता है।
थक्का बनकर ब्रेन में जाना (इस्केमिक स्ट्रोक): अगर किसी स्थान पर थक्का बनता है और वह खून के साथ दिमाग की तरफ चला जाए तो ब्रेन में रक्त का प्रवाह रुक सकता है। जिससे स्ट्रोक हो सकता है। इससे चक्कर, अचानक कमजोरी, बोलने में कठिनाई, चेहरे की झुकाव जैसी स्थिति दिखती है।
नसों का फटना और तेजी से रक्तस्राव: गंभीर दबाव से अंदर की नसें फट सकती हैं, जिससे तेज खून बह सकता है और ब्लड प्रेशर/हार्ट रेट पर असर पड़ सकता है।
शुरुआती घरेलू उपचार (जब निशान मामूली हो)
तुरंत बर्फ की सिकाई: शुरुआती 24–48 घंटे में बर्फ (कपड़े में लपेटकर) 10–15 मिनट के अंतराल पर 3-4 बार लगाने से सूजन और दर्द कम होते हैं। सीधे बर्फ त्वचा पर न रखें।
48–72 घंटे बाद गर्म सिकाई: प्रारंभिक सूजन कम होने पर हल्का गरम-साधन (गर्म कपड़ा या हीट पैड, 10–15 मिनट) लगाने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और तेज़ी से पीलिया जैसा रंग फीका पड़ने में मदद मिलती है।
कब डॉक्टर को दिखाएं (इमरजेंसी संकेत)
- चक्कर आना, तेज़ सिरदर्द या बेहोशी महसूस हो।
- चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में अचानक सुन्नपन या कमजोरी।
- बोलने या निगलने में कठिनाई, चेहरे के एक हिस्से का झुकना।
- घाव से तेज खून बहना या लगातार बढ़ता दर्द।