MP: सतना राजघराने में सौतन विवाद, बाबा राजा की पहली पत्‍नी ने दूसरी को मारी गोली, खूनी संघर्ष से कांप उठा राजपरिवार

मध्‍य प्रदेश के सतना जिले के नागौद राजघराने की परसमनिया गढ़ी में गुरुवार को पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब बहस के दौरान गोली चलने से राजपरिवार की बहू योगिता सिंह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

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MP: सतना राजघराने में सौतन विवाद, बाबा राजा की पहली पत्‍नी ने दूसरी को मारी गोली, खूनी संघर्ष से कांप उठा राजपरिवार | Image: Republic

मध्‍य प्रदेश के सतना जिले के नागौद राजघराने की परसमनिया गढ़ी में गुरुवार को पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब बहस के दौरान गोली चलने से राजपरिवार की बहू योगिता सिंह गंभीर रूप से घायल हो गईं। रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा, जो पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक नागेंद्र सिंह के भतीजे बताए जाते हैं, उनकी पहली पत्नी सुनीता सिंह और दूसरी पत्नी योगिता सिंह के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच पारिवारिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था।

जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक इस विवाद को सलटाने के लिए योगिता सिंह अपने परिजनों के साथ दो दिन पहले परसमनिया गढ़ी पहुंची थीं। यहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और विवाद बढ़ गया। इसी दौरान आरोप है कि सुनीता सिंह ने अपनी लाइसेंसी 22 बोर राइफल उठा ली और कई राउंड फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि करीब नौ राउंड गोलियां चलाई गईं। फायरिंग के दौरान एक गोली योगिता सिंह के पेट में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ीं।

पुलिस ने सुनीता सिंह को कर लिया गिरफ्तार

वहीं, पुलिस ने गोली चलाने वाली आरोपी महिला सुनीता परिहार को गिरफ्तार कर लाइसेंसी राइफल भी बरामद कर ली है।  सतना के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेम लाल कुर्वे ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह विवाद लंबे समय से चल रहा था और मामला संपत्ति या पारिवारिक कारणों से जुड़ा हो सकता है।

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पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद किस तरह इतना बढ़ गया कि गोली चलाने की नौबत आ गई।

1478 में हुई थी नागौद रियासत की स्थापना

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नागोद रियासत की स्थापना 1478 में परिहार राजपूतों ने की थी और 1950 में इसका भारतीय संघ में विलय हो गया था। 18वीं सदी तक इस रियासत को 'ऊंचेहरा' के नाम से भी जाना जाता था।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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