अपडेटेड 14 February 2026 at 09:39 IST
Beauty Tips: सनस्क्रीन खरीदते समय इन 3 बातों का जरूर रखें ध्यान, झुर्रियों से लेकर स्किन कैंसर तक में मिलेगा फायदा
Beauty Tips: सनस्क्रीन खरीदते समय कुछ बातों का खास खयाल रखना चाहिए। इस तरह से झुर्रियों से लेकर कैंसर तक की परिशानियों से आसानी से छुटकारा मिल सकता है। आइए आपको बताते हैं कि किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।
- लाइफस्टाइल न्यूज़
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Beauty Tips: आप चाहे जितना महंगा स्किन केयर प्रोडक्ट इस्तेमाल कर लें, अगर आपकी सनस्क्रीन सही नहीं है तो आपकी मेहनत और पैसे दोनों बेकार हो सकते हैं। सूरज से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणें स्किन को अंदर तक नुकसान पहुंचाती हैं। यही किरणें समय से पहले झुर्रियां, टैनिंग, सनबर्न और यहां तक कि स्किन कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती हैं। ऐसे में सही सनस्क्रीन को लगाना केवल एक ब्यूटी केयर टिप ही नहीं है, बल्क स्किन केयर की सेफ्टी के लिए भी बेहद जरूरी है।
सनस्क्रीन खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान
बाजार में सनस्क्रीन के काफी ऑप्शन आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन हर सनस्क्रीन एक जैसी सेफ्टी नहीं देती है। इसलिए खरीदते समय लेबल पर लिखी कुछ जरूरी बातों को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है।
SPF क्यों है जरूरी
SPF यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर इससे पता चलता है कि सनस्क्रीन आपको UVB किरणों से कितनी सुरक्षा मिलेगी। कम से कम SPF 30 वाली सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। SPF 30 लगभग 97 प्रतिशत तक UVB किरणों से बचाव करता है, जिससे सनबर्न और स्किन को होने वाले नुकसान का खतरा कम हो जाता है।
ब्रॉड स्पेक्ट्रम का मतलब समझें
सिर्फ SPF देख लेना काफी नहीं होता है। सनस्क्रीन पर ब्रॉड स्पेक्ट्रम लिखा होना जरूरी होता है। इसका मतलब है कि वह UVB के साथ साथ UVA किरणों से भी सेफ्टी देती है। UVA किरणें स्किन की गहराई तक पहुंचकर समय से पहले एजिंग और पिग्मेंटेशन का कारण बन सकती हैं।
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PA रेटिंग का क्या है महत्व
अक्सर सनस्क्रीन पर PA+, PA++ या PA+++ लिखा होता है। यह रेटिंग UVA किरणों से सुरक्षा के लेवल को बताती हैं। जितने ज्यादा प्लस के निशान होंगे, उतनी बेहतर सुरक्षा मानी जाती है। बेहतर बचाव के लिए कम से कम PA+++ वाली सनस्क्रीन चुनना समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
अपनी स्किन टाइप के अनुसार चुनें सनस्क्रीन
हर इंसान की स्किन अलग-अलग स्किन होती है, इसलिए एक ही सनस्क्रीन सभी के लिए सही नहीं होती है।
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ऑयली या एक्ने प्रोन स्किन
ऑयली या एक्ने प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए जेल बेस्ड या मैट फिनिश सनस्क्रीन चुननी चाहिए। लेबल पर नॉन कॉमेडोजेनिक लिखा होना चाहिए, ताकि पोर्स बंद न हों और पिंपल्स की समस्या न बढ़े।
ड्राई स्किन
ड्राई स्किन वालों के लिए क्रीम बेस्ड सनस्क्रीन बेहतर रहती है। इसमें हयालूरोनिक एसिड या सेरामाइड्स जैसे मॉइस्चराइजिंग तत्व हों तो त्वचा को अतिरिक्त नमी भी मिलती है।
सेंसिटिव स्किन
सेंसिटिव स्किन के लिए फिजिकल या मिनरल सनस्क्रीन उपयुक्त मानी जाती है। इनमें जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे तत्व होते हैं, जो स्किन की सतह पर एक परत बनाकर धूप से सुरक्षा देते हैं और जलन की संभावना कम करते हैं।
सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका
सही सनस्क्रीन खरीदना जितना जरूरी है, उसे सही तरीके से लगाना भी उतना ही अहम है। चेहरे और गर्दन के लिए पहली और दूसरी उंगली की लंबाई के बराबर सनस्क्रीन लें। सनस्क्रीन को बाहर निकलने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले लगानी चाहिए, ताकि वह स्किन पर अच्छी तरह सेट हो सके और असर दिखा सके। अगर आप लंबे समय तक धूप में हैं या ज्यादा पसीना आ रहा है, तो हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाना जरूरी होता है।
Published By : Kirti Soni
पब्लिश्ड 14 February 2026 at 09:39 IST