अपडेटेड 27 January 2026 at 16:13 IST

बिच्छू घास: दर्द, लकवा और हीमोग्लोबिन के लिए एक प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि

बिच्छु घास सर्दियों में प्राकृतिक उपचार का काम करती है। ये एक खास महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी है, इसके लाभों के बारे में स्वामी रामदेव ने विस्तार से बताया है। बिच्छू घास के बारे में जानकारी देते हुए स्वामी रामदेव का वीडियो आप यहां देख सकते हैं।

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Swami Ramdev on Scorpion grass
बिच्छु घास | Image: Patanjali

Swami Ramdev on Scorpion grass: आयुर्वेद सदियों से प्राकृतिक उपचार पद्धतियों पर आधारित रहा है, जहाँ रोगों के लक्षण नहीं बल्कि उनके मूल कारणों को ठीक करने पर जोर दिया जाता है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी है बिच्छू घास, जिसके लाभों के बारे में स्वामी रामदेव ने विस्तार से बताया है। पतंजलि के आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में बिच्छू घास को दर्द, लकवा, गठिया और कम हीमोग्लोबिन जैसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है।

आयुर्वेद में बिच्छू घास का महत्व

आयुर्वेदिक ग्रंथों में बिच्छू घास को नसों को मजबूत करने और रक्त को शुद्ध करने वाली औषधि के रूप में वर्णित किया गया है। स्वामी रामदेव के अनुसार, पतंजलि का उद्देश्य प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक शोध के साथ पुनः स्थापित करना है।

दर्द और गठिया में लाभ

गठिया और जोड़ों का दर्द अक्सर सूजन और ऊतकों के क्षरण के कारण होता है। बिच्छू घास में सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं, जो दर्द और अकड़न को कम करने में सहायक होते हैं। पतंजलि का मानना है कि औषधियों के साथ योग और जीवनशैली में सुधार से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

लकवा और तंत्रिका तंत्र में सहायक

आयुर्वेद के अनुसार लकवा वात दोष के असंतुलन से जुड़ा होता है। स्वामी रामदेव बताते हैं कि बिच्छू घास वात को संतुलित कर तंत्रिकाओं को मजबूत करने में मदद कर सकती है। पतंजलि इसे योग और फिजियोथेरेपी के साथ सहायक उपाय के रूप में देखता है।

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स्वामी रामदेव द्वारा इस विषय पर दिए गए मार्गदर्शन का वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें: 

हीमोग्लोबिन बढ़ाने में भूमिका

कम हीमोग्लोबिन थकान और कमजोरी का कारण बनता है। बिच्छू घास रक्त शुद्धिकरण और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायक मानी जाती है। पतंजलि आयुर्वेद में इसका उपयोग प्राकृतिक समाधान के रूप में किया जाता है। बिच्छू घास आयुर्वेद की गहराई और प्रभावशीलता का एक उदाहरण है। स्वामी रामदेव और पतंजलि के मार्गदर्शन में यह जड़ी-बूटी प्राकृतिक स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 27 January 2026 at 16:13 IST