अपडेटेड 21 February 2026 at 18:09 IST

पतंजलि गुरुकुल में मूल्य-आधारित शिक्षा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा

पतंजलि गुरुकुल में स्वामी रामदेव ने शिक्षा के असली मकसद पर गहराई से प्रकाश डाला। उनका कहना है कि शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान या नौकरी पाने का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव है। जानें और क्या कहा

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Swami Ramdev
स्वामी रामदेव का संदेश | Image: Patanjali

Swami Ramdev on Education: शिक्षा सिर्फ जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया है। पतंजलि गुरुकुल में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव ने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली को संस्कार, अनुशासन और आध्यात्मिक आधार से जोड़ना आवश्यक है। पतंजलि के शैक्षिक मॉडल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ नैतिक, अनुशासित और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों। यह संबोधन शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के गहरे संबंध को स्पष्ट करता है।

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स्वामी रामदेव के मुताबिक शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य सिर्फ परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं है। अगर शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित हो जाए, तो समाज में नैतिक संतुलन कमजोर हो सकता है। पतंजलि गुरुकुल में विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ जीवन मूल्यों की शिक्षा दी जाती है, जिससे वे आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

गुरुकुल प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता अनुशासित दिनचर्या है। विद्यार्थियों का दिन प्रातःकालीन योग और प्राणायाम से आरंभ होता है। स्वामी रामदेव मानते हैं कि जब शरीर स्वस्थ और मन एकाग्र होता है, तभी अध्ययन प्रभावी रूप से संभव है। नियमित योगाभ्यास से विद्यार्थियों में एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है।

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पतंजलि के शैक्षिक मॉडल में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान दोनों का समन्वय किया गया है। विद्यार्थी गणित, विज्ञान और समकालीन विषयों का अध्ययन करते हैं, साथ ही भारतीय संस्कृति, शास्त्र और नैतिक मूल्यों से भी परिचित होते हैं। इस संतुलन का उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाना है, जबकि अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

स्वामी रामदेव विशेष रूप से चरित्र निर्माण पर बल देते हैं। सत्य, अनुशासन, सेवा और परिश्रम जैसे गुण शिक्षा के केंद्र में होने चाहिए। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी प्रारंभिक अवस्था से ही इन मूल्यों को अपनाते हैं, तो वे भविष्य में ईमानदार नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण से संभव है।

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सामूहिक प्रार्थना और ध्यान की परंपरा गुरुकुल वातावरण का अभिन्न अंग है। इससे विद्यार्थियों में सामूहिकता की भावना विकसित होती है। प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की भावना भी उतनी ही आवश्यक है। स्वामी रामदेव बताते हैं कि समाज तभी सशक्त होगा जब व्यक्ति केवल स्वयं की सफलता नहीं, बल्कि सामूहिक प्रगति के बारे में भी सोचे।

पतंजलि गुरुकुल में सादगीपूर्ण जीवनशैली को प्रोत्साहित किया जाता है। अत्यधिक उपभोक्तावाद और डिजिटल व्यसन से दूर रहकर विद्यार्थी आत्मनियंत्रण सीखते हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें मानसिक रूप से स्थिर और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाता है। आज के समय में जब युवा वर्ग अनेक प्रकार के विचलनों का सामना करता है, यह अनुशासित वातावरण सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

महिला शिक्षा को भी समान महत्व दिया जाता है। स्वामी रामदेव का मत है कि शिक्षित और आत्मविश्वासी महिलाएं समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पतंजलि के शैक्षिक प्रयासों में बालिकाओं को समान अवसर और नेतृत्व प्रशिक्षण दिया जाता है।
यह संबोधन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है। यदि विद्यार्थी नैतिकता, अनुशासन और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ते हैं, तो समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

पतंजलि गुरुकुल का मॉडल मूल्य-आधारित, संतुलित और समग्र शिक्षा का उदाहरण प्रस्तुत करता है। स्वामी रामदेव का संदेश स्पष्ट है कि शिक्षा को चरित्र, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना आवश्यक है। जब विद्यार्थी ज्ञान के साथ नैतिकता और अनुशासन को अपनाते हैं, तभी एक सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण संभव होता है।  

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Published By : Nidhi Mudgill

पब्लिश्ड 21 February 2026 at 18:02 IST