कौन हैं संत और कवि तिरुवल्लुवर? जिनकी किताब पीएम मोदी ने पुतिन को की है गिफ्ट, कन्याकुमारी में स्थित है 133 फीट ऊंची मूर्ति
महान तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की सबसे प्रसिद्ध और भव्य प्रतिमा तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित है। यह विशाल प्रतिमा समुद्र के बीचों-बीच एक चट्टान पर स्थापित है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाती है। यह प्रसिद्ध विवेकानंद रॉक मेमोरियल के ठीक पास स्थित है। आखिर इनकी किताब पीएम मोदी ने पुतिन को क्यों भेट की?
- भारत
- 2 min read

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 45 मिनट की अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को महान तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध पुस्तक ‘तिरुक्कुरल’ का 2026 में प्रकाशित विशेष रूसी संस्करण भेंट किया।
पीएम मोदी और पुतिन की ऐतिहासिक मुलाकात
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट (BRICS Summit) से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब 45 मिनट की द्विपक्षीय वार्ता हुई। मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को महान कवि और संत तिरुवल्लुवर एक खास किताब ‘तिरुक्कुरल’ भेंट की। 2026 में प्रकाशित इस संस्करण को रूसी भाषा में अनुवाद किया गया है। द्विपक्षीय वार्ता से ठीक पहले पीएम मोदी ने गर्मजोशी से राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत किया और हाथ मिलाने के बाद उन्हें गले भी लगाया। सोशल मीडिया पर अब पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं और ये चर्चा का विषय बना हुआ है।
कौन थे महान संत तिरुवल्लुवर?
तिरुवल्लुवर प्राचीन तमिल साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित दार्शनिक और संत कवि माने जाते हैं। इतिहास में उनके जन्मस्थान, परिवार या धार्मिक पहचान के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलते। यही कारण है कि उन्हें किसी एक धर्म की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता; वे हर समुदाय के लिए सर्वमान्य हैं। उनकी कालजयी रचना ‘तिरुक्कुरल’ को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण दार्शनिक और नैतिक किताबों में गिना जाता है। यह परंपरा करीब 2,000 साल पुरानी है। आपको बता दें, इस अद्भुत ग्रंथ में नैतिकता, समाज, सुशासन, अर्थव्यवस्था और जीवन के गहरे विषयों पर बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली ज्ञान दिया गया है।
कन्याकुमारी में स्थित है 133 फीट ऊंची प्रतिमा
कन्याकुमारी में समुद्र के बीच, विवेकानंद रॉक मेमोरियल के ठीक पास तिरुवल्लुवर की एक विशाल चट्टानी प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा की कुल ऊंचाई 133 फीट है, जो सीधे तौर पर ‘तिरुक्कुरल’ के 133 अध्यायों का प्रतिनिधित्व करती है। इसका 38 फीट ऊंचा आधार ग्रंथ के ‘अरम’ सदाचार से जुड़े 38 अध्यायों को दर्शाता है, जिसके ऊपर 95 फीट ऊंची मुख्य मूर्ति स्थापित है। लगभग 7,000 टन वजनी इस कलाकृति का निर्माण मशहूर मूर्तिकार वी. गणपति स्थापति ने किया था। इस ऐतिहासिक प्रतिमा का भव्य उद्घाटन 1 जनवरी 2000 को किया गया था।