Earthquake: दिल्ली-NCR में बैंकॉक जैसा आए 7.7 तीव्रता का भूचाल तो क्या होगा? राजधानी में मच सकती है कितनी तबाही

भारत को भूकंप के लिहाज से 5 जोन में बांटा गया है। दिल्ली भूकंपीय जोन-4 में आता हैं। जिसमें 5-6 तीव्रता से लेकर, 6-8 तीव्रता तक के भूकंप आने की संभावना है।

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दिल्ली-NCR में आए बैंकॉक जैसा भूकंप तो क्या होगा? | Image: AI Generated Photo

Earthquake news : म्यांमार और थाईलैंड समेत शुक्रवार की दोपहर 5 देशों में आए भूकंप के झटकों से लोग थर्रा उठे। म्यामांर में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.7 मापी गई है। इसके कारण थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में बहुत भारी नुकसान हुआ है। कई इमारतें जमींदोज हो गई और सैकड़ों लोग लापता हैं। इस शक्तिशाली भूकंप के झटके मेघालय और चीन में भी महसूस किए गए हैं।

रिक्‍टर स्‍केल पर 7.7 के भूकंप बहुत ही विनाशकारी होता है। इसमें धरती बहुत तीव्र कंपन के साथ हिलती है, जिससे जानमाल का काफी नुकसान होता है और सूनामी आने का खतरा भी बढ़ जाता है। आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि अगर दिल्ली-NCR में ऐसा विनाशकारी भूकंप आया तो क्या होगा? आपके तमाम सवालों का जवाब हम इस लेख में देगें, लेकिन पहले जानते हैं कि आखिर भूकंप आते ही क्यों है?

क्यों आते हैं भूकंप?

सीधे और आसान शब्दों में कहें तो भूकंप पृथ्वी की सतह पर होने वाली हलचल या कंपन हैं, जो पृथ्वी की आंतरिक संरचना में होने वाली गतिविधियों के कारण आते हैं। पृथ्वी की आंतरिक संरचना को 3 परतों में बांटा गया है। भूपर्पटी (Crust), मेंटल (Mantle) और क्रोड (Core)। पृथ्वी की सबसे बाहरी परत कई टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार धीमी गति से चलती रहती हैं। धीरे-धीरे हर साल 2-5 सेमी खिसकती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, दूर हटती हैं या एक-दूसरे के नीचे सरकती हैं, तो एक तनाव पैदा होता है। जिसके कारण हमें भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

दिल्ली में आए 7.7 का भूंकप तो क्या होगा?

भारत को भूकंप के लिहाज से 5 जोन में बांटा गया है। राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां 7.7 तीव्रता का भूंकप आने के बहुत कम चांस हैं। दिल्ली भूकंपीय जोन-4 में आता हैं। जिसमें 5-6 तीव्रता के भूकंप से लेकर, 6-8 तीव्रता तक के भूकंप आने की संभावना है। दिल्ली में अगर 7.7 तीव्रता का भूकंप आता है, तो वो असामान्य और बहुत विनाशकारी होगा। इसके प्रभाव और परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। दिल्ली की अधिकतर इमारतें 7 तीव्रता का भूकंप झेलने में भी सक्षम नहीं हैं।

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भगदड़ और हादसों की संभावना

दिल्ली हिमालय क्षेत्र से 250-350 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर के कारण भूकंप आते हैं। दिल्ली रानी और अनधिकृत कॉलोनियों में इमारतें सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, हाई-राइज बिल्डिंग्स ज्यादा हिलेंगी। दिल्ली, हिमालय से करीब 600 किलोमीटर दूर है। भूकंप की सतह तरंगें 200-400 किलोमीटर की दूरी पर सबसे ज्यादा असर करती हैं। दिल्ली की घनी आबादी और तंग गलियों के कारण भूकंप के दौरान भगदड़ और हादसों की संभावना अधिक बढ़ जाएगी।

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एक नहीं, अनेक चुनौतियां

दिल्ली में बड़े भूकंप के बाद होने वाली तबाही से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी। चिंता ये भी है कि बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने पर अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव बढ़ जाएगा। अगर सड़कें और पुल टूट जाते हैं तो बचाव अभियान में देरी होगी। मेट्रो को नुकसान पहुंचने पर ये परेशानी कई गुना बढ़ सकती है। बिजली और पानी की सप्लाई बाधित हो जाएंगी, गैस पाइपलाइनों में रिसाव होने से आग लगने का खतरा भी बढ़ जाएगा। दिल्ली देश की राजधानी और आर्थिक केंद्र है। भूकंप से व्यापार भी ठप होगा, जिससे अरबों रुपये का नुकसान हो सकता है।

10 रिक्‍टर स्‍केल का भूकंप आने से क्या होगा?

6.9 रिक्‍टर स्‍केल

पूरे शहर में भूकंप का प्रभाव दिखता है। कच्चे घर जमींदोज हो जाते हैं, इमारतों की नींव दरक सकती है। दुनिया में हर साल ऐसे करीब 200 भूकंप आते हैं।

7.9 रिक्‍टर स्‍केल

ये भूकंप बहुत विनाशकारी होते हैं। बहुत तीव्र कंपन महसूस होता है, जानमाल का काफी नुकसान होता है। बड़ी इमारतें गिर सकती हैं और सूनामी आने का खतरा भी बढ़ जाता है।

8.9 रिक्‍टर स्‍केल

8.9 रिक्‍टर स्‍केल पर जानमाल का भारी नुकसान होता है। बड़े-बड़े पुल ढह सकते हैं, शहर के शहर तबाह हो सकते हैं।

9.9 रिक्‍टर स्‍केल

पृथ्‍वी के बड़े हिस्‍से का नाश हो जाएगा। मैदानी धरती खेत की तरह लहराएगी। ऐसी प्रलय की सिर्फ कल्पना करना मुश्किल है।

10 रिक्‍टर स्‍केल

10 रिक्‍टर स्‍केल का भूकंप आने पर शायद ही धरती पर कोई बचे। 

Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड