'कांग्रेस अभी भी 1937 की...,' BJP ने 'वंदे मातरम्' के सम्मान के लिए पारित किया 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव

Vande Mataram: शनिवार, 22 अगस्त को भाजपा के नए पदाधिकारियों की बैठक हुई। इस बैठक में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के सम्मान और उसकी विरासत की रक्षा के लिए बीजेपी ने 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव पारित किया।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
BJP passes resolution on Vande Mataram announces campaign
BJP ने 'वंदे मातरम्' के सम्मान के लिए पारित किया 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव | Image: ANI

Vande Mataram: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को 'वंदे मातरम' के सम्मान और ऐतिहासिक विरासत पर एक अहम प्रस्ताव पास किया और कहा कि वह इस राष्ट्रीय गीत के इतिहास और महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाएगी।

गौरतलब है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज अपनी नई टीम की पहली बैठक ली। इस बैठक में 'वंदे मातरम' को लेकर 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। नितिन नवीन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि वंदे मातरम् के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया हैं। इस दौरान बीजेपी ने कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सिर्फ दो छंदों के गायन की निंदा भी की है।

'वंदे मातरम' पर बीजेपी का 10 सूत्रीय प्रस्ताव

  • 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए वन्दे मातरम् के प्रथम दो पदों तक गायन सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट विरोध करेगी।
  • पूर्ण वन्दे मातरम् के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा करेगी, इसे भारत का राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत मानेगी।
  •  1950 में संविधान सभा की घोषणा तथा 2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय गीत को जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान किए जाने से स्थापित स्थिति की दृढ़ता से पुष्टि करेगी।
  • राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण अथवा संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति के अधीन करने के हर प्रयास का विरोध करेगी।
  • कांग्रेस को स्मरण कराएगी कि उसकी कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव भारत के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। 1937 का राजनीतिक समझौता 1950 के संवैधानिक निर्णय और 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
  • जनता के सामने उस ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को उजागर करेगी, जिसमें वन्दे मातरम् के गायन को सीमित किया गया था, जिसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां तथा बाद में बढ़ती सांप्रदायिक और अलगाववादी मांगों की राजनीति शामिल थी।
  • महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को जन-जन तक पहुंचाएगी, जिसमें उन्होंने वन्दे मातरम् को “साम्राज्यवाद-विरोधी नारा” और “शुद्धतम राष्ट्रीय भावना” से जुड़ा हुआ बताया था।
  • भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से देशव्यापी अभियान चलाएगी, जिसके अंतर्गत वन्दे मातरम् का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत भारत के हर कोने तक पहुंचाई जाएगी।
  • विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता का अभियान चलाया जाएगा, ताकि छह पदों वाले पूर्ण राष्ट्रीय गीत और उसके इतिहास को विस्मृति में न जाने दिया जाए तथा आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि वन्दे मातरम् के साथ भारत की स्वतंत्रता, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र-जागरण की कितनी गहरी स्मृतियां जुड़ी हैं।
  • राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए वन्दे मातरम् के सम्मान और विरासत से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

देशवासियों से भाजपा की खास अपील 

नितिन नवीन ने कहा कि 'यह केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा विषय नहीं है। यह भारत के सम्मान और उन असंख्य देशभक्तों की विरासत का प्रश्न है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

भारतीय जनता पार्टी देशवासियों से आह्वान करती है कि वे स्मरण रखें - वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई थी। पीढ़ियों के भारतीयों ने इन्हें स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्र गौरव के मंत्र के रूप में अपनाया।

Advertisement

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

प्रस्ताव पारित होने के बाद भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा, "कांग्रेस अभी भी 1937 की मानसिकता में फंसी हुई है, जबकि अब 2026 चल रहा है। देश आगे बढ़ चुका है।' वहीं, भाजपा सांसद तरुण चुघ ने कहा, “वंदे मातरम गाना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। लेकिन कांग्रेस अभी भी देश को 1930 के दशक में वापस ले जाना चाहती है। यह भारत के संविधान का अपमान है। यह भारत की संघीय संरचना का अपमान है।”

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों को मिलेगी अलग पहचान: सिलीगुड़ी कॉरिडोर बैठक में अमित शाह ने स्थायी समाधान का दिया भरोसा
 

Advertisement
Published By:
 Sahitya Maurya
पब्लिश्ड