संसद में गूंजेगा 'वंदे मातरम' का स्वर, राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे होने पर 10 घंटे होगी बहस, पीएम मोदी भी होंगे शामिल
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र में विशेष चर्चा का आयोजन होगा। लोकसभा में इसी हफ्ते 10 घंटे की बहस होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाग लेंगे।
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भारतीय संसद एक बार फिर से स्वतंत्रता संग्राम के अमर गीत 'वंदे मातरम' से गूंजने के लिए तैयार है। सूत्रों के मुताबिक भारत के राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र में विशेष चर्चा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, इसी हफ्ते गुरुवार या शुक्रवार को होने वाली इॉस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लेंगे।
1870 के दशक में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत, प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' का हिस्सा है, 1882 में पहली बार प्रकाशित हुआ था। 1950 में इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। इसकी रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने संसदीय स्तर पर एक विशेष चर्चा का प्रावधान किया है, जो राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है।
10 घंटे का समय निर्धारित
लोकसभा में यह बहस इसी सप्ताह के अंतिम दिनों यानी गुरुवार या शुक्रवार को होगी, और इसके लिए पूरे 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। राज्यसभा में भी सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों ने इसकी मजबूत पैरवी की, ताकि सभी सांसद इस ऐतिहासिक अवसर पर अपनी राय रख सकें।
पीएम मोदी भी होंगे चर्चा में शामिल
खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस चर्चा में हिस्सा लेंगे। हाल ही में उन्होंने 'मन की बात' कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता आंदोलन की अमर धरोहर करार देते हुए युवाओं से इसका नियमित गान करने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि यह गीत न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है। इसी कड़ी में केंद्र ने पहले ही एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी कर इसकी याद ताजा की है।
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विपक्षी दलों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने लोकसभा में विशेष बहस का स्वागत किया। INDI गठबंधन के नेता मल्लिकार्जुन खाड़गे के कार्यालय में इस मुद्दे पर रणनीति तय करेंगे। यह चर्चा संसद के शीतकालीन सत्र का हिस्सा है, जो 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें होंगी।
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