आर्युवेद और देसी नुस्खों से हेल्दी लाइफ की टिप्स...राष्ट्रपति मुर्मू ने की सुभाष गोयल के पहल की सराहना
वैदबाण आयुर्वेदिक के प्रबंध निदेशक सुभाष गोयल ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान आयुर्वेद, भारतीय पारंपरिक जीवनशैली, खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
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वैदबाण आयुर्वेदिक के प्रबंध निदेशक सुभाष गोयल ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान आयुर्वेद, भारतीय पारंपरिक जीवनशैली, खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक जीवनशैली से जुड़े प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर सुभाष गोयल को सम्मानित भी किया गया।
मुलाकात के दौरान सुभाष गोयल की बेटी एवं डॉ. मिशेल गोयल भी मौजूद रहीं। दोनों ने राष्ट्रपति के साथ भारतीय स्वास्थ्य परंपराओं और आयुर्वेद से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। बातचीत में पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़ने तथा स्वस्थ जीवन के लिए प्राकृतिक एवं संतुलित आदतों को अपनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
राष्ट्रपति से मिलकर क्या बोले सुभाष गोयल
सुभाष गोयल ने राष्ट्रपति से मुलाकात और सम्मान को अपने परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्वेद में स्वास्थ्य और जीवनशैली से संबंधित उपयोगी ज्ञान का व्यापक भंडार मौजूद है। उनका उद्देश्य इसी पारंपरिक ज्ञान को लोगों तक पहुंचाना और दैनिक जीवन में इसके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
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उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में खान-पान, दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली का विशेष महत्व रहा है। बदलती जीवनशैली के दौर में इन पारंपरिक पहलुओं को समझना और उन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाना लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। उनके अनुसार, आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से भी जुड़ा हुआ है।
डॉ. मिशेल गोयल ने भी मुलाकात को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भारतीय परंपराओं और संस्कृति में रुचि विशेष रूप से प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में पुरानी और अच्छी आदतों को दोबारा अपनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्राकृतिक जीवनशैली, संतुलित खान-पान और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
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मुलाकात के दौरान भारतीय खान-पान की परंपराओं और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर भी चर्चा हुई। गोयल परिवार का मानना है कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली में मौजूद कई आदतें आज भी प्रासंगिक हैं और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
सुभाष गोयल ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलना और उनके हाथों सम्मान प्राप्त करना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण अनुभव है। उन्होंने इस सम्मान को आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक जीवनशैली के प्रति उनके प्रयासों के लिए प्रोत्साहन के रूप में बताया।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पारंपरिक भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों, प्राकृतिक जीवनशैली और संतुलित खान-पान को लेकर लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। आयुर्वेद से जुड़े प्रयासों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने और भारतीय जीवनशैली के सकारात्मक पहलुओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में इस तरह के संवाद को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात ने आयुर्वेद, भारतीय परंपराओं और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े विषयों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया। सुभाष गोयल और डॉ. मिशेल गोयल ने इस अवसर को भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रेरणादायक बताया।