कानपुर किडनी रैकेट मामले में योगी सरकार का ताबड़तोड़ एक्शन, 2 और गिरफ्तार, NCR के बड़े अस्‍पतालों जुड़ा कनेक्शन; खुला बड़ा राज

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पारुल और आयुष का किडनी ट्रांसप्लाट करने आई डॉक्टरों की टीम के 2 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

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Yogi Govt Action in Kanpur Kidney Racket
कानपुर किडनी रैकेट मामले में योगी सरकार का ताबड़तोड़ एक्शन, 2 और गिरफ्तार, NCR के बड़े अस्‍पतालों जुड़ा कनेक्शन; खुला बड़ा राज | Image: Republic/Pixabay

कानपुर से गौरव त्रिवेदी की रिपोर्ट

कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पारुल और आयुष का किडनी ट्रांसप्लाट करने आई डॉक्टरों की टीम के 2 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों ओटी टेक्‍नीशियन हैं। एक की पहचान कुलदीप सिंह राघव गोपाल हॉस्पिटल इंदिरापुरम गाजियाबाद और दूसरे की पहचान राजेश कुमार सर्वोदय हॉस्पिटल नोएडा के रूप में हुई है।

वहीं इस पूरे सनसनीखेज मामले में पुलिस ने 4 फरार डॉक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। जांच एजेंसियों को शक है कि ये डॉक्टर शहर के बड़े अस्पतालों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस गिरफ्तार दोनों ओटी टेक्‍नीशियनों से पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे नेक्‍सस के जड़ तक पहुंचा जा सके और इसे खत्म किया जा सके।

कानपुर किडनी कांड में दिल्‍ली-मेरठ के अस्‍पताल का कनेक्श्‍न

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सीएमओ कार्यालय के डॉक्टरों की टीम को आयुष, शिवम अग्रवाल और अन्य आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के नर्सिंगहोम में अनधिकृत तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा है। यहां डॉक्टर और सर्जन कहीं और से बुलाए जाते हैं। सर्जरी दूसरी जगह पर होती है। इसके बाद किडनी रोगियों व डोनर का इलाज किसी अन्य नर्सिंगहोम में किया जाता है।

डीसीपी कानपुर पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि आयुष और शिवम अग्रवाल ने पूछताछ में डॉ. अफजल और डॉ. वैभव की जानकारी दी है। दोनों का कहना है कि डॉ. अफजल और डॉ. वैभव बड़ी संख्या में किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके हैं। अल्फा हॉस्पिटल में डोनर और किडनी रोगियों की जांचें हुई। उनकी सर्जरी की प्लानिंग की गई फिर उन्हें दिल्ली के दो बड़े अस्पतालों में भेजा गया। यहां पर ऑपरेशन के तुरंत बाद गुर्दा रोगी और डोनर की दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाता था।

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60 लाख में बिकती थी जिंदगी… गरीबों का होता था सौदा

जांच में सामने आया है कि कुछ डॉक्टर लखनऊ से आकर कानपुर में अवैध सर्जरी करते थे। इन गैरकानूनी ऑपरेशनों को ‘काली सर्जरी’ कहा जा रहा है। इस रैकेट में एक किडनी की कीमत करीब 60 लाख रुपये तक वसूली जाती थी, जबकि डोनर को सिर्फ 8–9 लाख रुपये दिए जाते थे। बाकी रकम डॉक्टरों और दलालों के बीच बांटी जाती थी।

फिलहाल STF, CMO और विजिलेंस टीमें मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई बड़े डॉक्टरों और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। 

कई टीमें दबिश में जुटीं, लखनऊ तक फैली जांच

कानपुर के चर्चित किडनी ट्रांसप्लांट कांड में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। डीसीपी पश्चिम कासिम आब्दी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें अलग-अलग स्थानों पर दबिश दे रही हैं। उन्होंने कहा कि कानपुर समेत अन्य संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं एक विशेष टीम लखनऊ में भी तैनात की गई है, जो वहां से जुड़े कनेक्शन और नेटवर्क की जांच कर रही है।

पुलिस का मानना है कि यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग शहरों के लोग शामिल हैं। इसी को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया गया है। इससे पहले दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनसे पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस अब बाकी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द ही बड़े खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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