UP: संभल, वाराणसी के बाद लखनऊ में मिला 150 साल पुराना मंदिर, 30 साल पहले डॉ. शाहिद के कब्जा करने का दावा, पूरी कहानी

मंदिर पक्ष का दावा है कि यह मंदिर 1885 में स्थापित किया गया था, जिसे 1993-94 में अवैध रूप से कब्जा कर शॉपिंग कंपलेक्स में बदल दिया गया था।

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लखनऊ में मिला 150 साल पुराना मंदिर | Image: Shutterstock / Representative

अजय दुबे की रिपोर्ट  

Lucknow Temple : उत्तर प्रदेश की राजधानी के विधानसभा मार्ग स्थित राणा प्रताप चौराहे के पास एक बिल्डिंग के नीचे 30 साल से बंद पड़े मंदिर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो उठा है। मंदिर से जुड़े लोगों ने इस मामले को लखनऊ के कमिश्नर रोशन जैकब को बताया और मंदिर को फिर से खोले जाने की अपील की। वहीं, कमिश्नर ने मामले को डीएम के पास सुनवाई के लिए भेजा है। मंदिर पक्ष का दावा है कि यह मंदिर 1885 में स्थापित किया गया था, जिसे 1993-94 में अवैध रूप से कब्जा कर शॉपिंग कंपलेक्स में बदल दिया गया था।

इस मामले में मंदिर पक्ष के द्वारा दावा किया गया है कि यह मंदिर 1885 का है जो की स्वर्गीय गजराज सिंह ने अपनी कमाई से अपनी जमीन पर बनवाया था और फिर 1906 में रजिस्टर्ड वसीयत कर उस जमीन पर एक ठाकुर द्वारा शिवालय का निर्माण कराया गया। इसके बाद 1918 में पूजा अर्चना के लिए एक ख्वाहिश नाम बनाया जिसमें स्वर्गीय द्वारका प्रसाद दीक्षित को पुजारी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी और कहा गया कि उनकी पुश्त दर पुश्त यहां पर पूजा पाठ करती रहेगी। द्वारका प्रसाद के बाद लालता प्रसाद फिर उमाशंकर दीक्षित फिर रामकृष्ण दीक्षित और फिर यज्ञ मनी दीक्षित के पास यहां पूजा पाठ का अधिकार मिला। लेकिन रामकृष्ण दीक्षित जब यहां मंदिर की पूजा पाठ कर रहे थे तब 1993- 1994 के बीच एक दल से जुड़े हुए नेता डॉक्टर शाहिद ने मंदिर पर कब्जा किया और सरकारी संरक्षण में बिना नक्शा पास कराए भूमि पर अवैध निर्माण करवाया। 

ये जमीन पहले मंदिर परिसर का हिस्सा थी- मंदिर पक्ष 

मंदिर पक्ष ने दावा किया है कि यहां अब शॉपिंग कंपलेक्स दुकानें बना दी गई है, लकिन पहले यहां मंदिर हुआ करता था, इस परिसर में एक राधा रानी का मंदिर, एक शिवालय, एक बरगद का पेड़ और कुछ पुरानी दुकान थीं जिससे मंदिर का खर्च चलता था, लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ यहां से हटा दिया गया।

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संभल, वाराणसी के बाद कई जगह और मिले मंदिर 

उत्तर प्रदेश के संभल में लगातार एक के बाद एक करके कई मंदिरों की खोज हुई अभी भी खोज जारी है। इसके अलावा भी प्रदेश के मुजफ्फर नगर, बुलंद शहर और वाराणसी सहित कई जिलों से मंदिरों के सामने आने की बात सामने आई है। इन मंदिरों पर अल्पसंख्यक समुदाय के कब्जा कर रखा था और यहां पूजा-पाठ भी नहीं हो रहा थी। इस बीच अमेठी में एक 120 साल पुराना मंदिर अस्तित्व में आया है जिसके बारे में स्थानीय लोगों ने एसडीएम से शिकायत भी की है और कहा है कि पिछले लगभग 20 सालों से ये मंदिर बंद पड़ा है इस पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो लोग इस मंदिर में पूजा-अर्चना भी नहीं करने दे रहे हैं। एसडीएम ने शिकायत मिलने के बाद तहसीलदार को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। 

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Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड