'जॉनी-जॉनी यस पापा' Poem पर UP में बवाल, योगी के मंत्री ने की ऐसी कविताओं को सिलेबस से हटाने की मांग तो कांग्रेस बोली- बच्चा पेपर लीक...
'जॉनी-जॉनी यस पापा' और 'रेन-रेन गो अवे' को लेकर यूपी के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखा है। उन्होंने इन अंग्रेजी कविताओं को सिलेबस से हटाने की मांग की है, जिस पर विपक्ष ने उन्हें घेरा है।
- भारत
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UP: बच्चों की सबसे लोकप्रिय कविता 'जॉनी-जॉनी यस पापा' और 'रेन-रेन गो अवे' को लेकर उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह कविताएं बच्चों को गलत संस्कार देने के साथ उनमें झूठ बोलने की प्रवृत्ति बढ़ाती हैं। यह भारतीय संस्कृति और मूल्यों के भी खिलाफ है। इतना ही नहीं, उन्होंने इसे लेकर मानव संसाधन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखा और इन कविताओं को सिलेबस से हटाने की भी मांग कर दी है।
दरअसल, योगेंद्र उपाध्याय ने शनिवार को कानपुर में आयोजित शिक्षामित्रों के सम्मान समारोह में कहा था कि संस्कार देखिए। बड़े शौक से अपने बच्चों से कहते हैं कि जरा अंकल को सुनाओ Johny-Johny Yes Papa, Eating Sugar, No Papa। यह कविता झूठ बोलने का संस्कार देती है। कविता के आगे की लाइन Telling A Lie, No Papa, Open Youth Mouth, Ha-Ha-Ha। इसमें मजाक उड़ाया जाता है। आखिर हम बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?
शिक्षा मंत्री ने की कविता की आलोचना
उन्होंने आगे कहा, 'Rain-Rain Go Away, Come Again Another Day, Little Johnny Wants To Play। यानी लिटिल जॉनी खेलना चाहता है, इसलिए बारिश चली जाए। बच्चे का खेलना ही सबसे जरूरी हो गया। यह कौन सा संस्कार है। यह हमारी संस्कृति नहीं है, जो 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' पर आधारित है।
शिक्षा वही जो संस्कार दे- योगेंद्र उपाध्याय
योगेंद्र उपाध्याय ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा, 'देखिए मैंने कहा था कि शिक्षा वह है जो संस्कार दे। संस्कार विहीन शिक्षा कभी आदर का पात्र नहीं हो सकती, क्योंकि उससे राष्ट्र निर्माण नहीं होता। न ही आगे वाली नस्लों का निर्माण नहीं होता।'
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उन्होंने आगे कहा, 'जाने अनजाने में हम कभी-कभी कुछ ऐसी बातें बच्चों को सिखा जाते हैं, जो हम भी नहीं समझते और बच्चों में संस्कार देने के बजाय कुसंस्कार दे देती हैं। जैसे हमारे संस्कारों में है कि सत्य बोलना चाहिए। हमारे संस्कारों में सम्मान बड़ों का करना चाहिए। लेकिन एक कविता है- जॉनी-जॉनी यस पापा ईटिंग शुगर नो पापा यानी झूठ बोलना। टेलिंग ए लाइ नो पापा और दृढ़ता से झूठ बोलना तो झूठ बोलने का जाने अनजाने में बच्चे के कोमल मन पर एक संस्कार चला गया। मन मस्तिष्क पर चला गया।'
ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रही BJP- सपा
योगेंद्र उपाध्याय के इस बयान पर विपक्ष हमलावर है। समाजवादी पार्टी ने मंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की। पार्टी के प्रवक्ता शर्वेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि ऐसे मुद्दे सिर्फ बीजेपी की नाकामियों को छिपाने के लिए उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'बीजेपी ने पिछले 9 सालों में कुछ नहीं किया। ऐसे में उनके पास लोगों को बताने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वो ऐसे मुद्दे उठाते हैं।'
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राइम बदलना नहीं, यूनिवर्सिटी के क्राइम रोकना काम- कांग्रेस
वहीं कांग्रेस ने एक्स पर ट्वीट कर लिखा, 'यूपी के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय जी को लगता है कि 'जॉनी-जॉनी यस पापा' जैसी कविताओं से बच्चे झूठ बोलना सीख रहे हैं। मंत्री जी, बच्चा कविता से झूठ नहीं सीखता, बच्चा 'पेपर लीक' देखने के बाद व्यवस्था पर अविश्वास करना सीखता है। बच्चा तब झूठ सीखता है जब मुख्यमंत्री जी सदन में खड़े होकर कहते हैं कि 'बेरोजगारी नहीं है'।'
उन्होंने आगे लिखा, 'शिक्षा मंत्री का काम 'नर्सरी की राइम' बदलना नहीं, 'यूनिवर्सिटी के क्राइम' और 'करप्शन' रोकना है। थोड़ा गरिमा का ख्याल रखिए!'