PM मोदी की पट्रोल-डीजल बचाने की अपील पर बिफरा विपक्ष, कांग्रेस ने की संसद के विशेष सत्र बुलाने की मांग तो अखिलेश बोले- चुनाव खत्म होते ही...
पीएम मोदी की बचन बढ़ाने और खर्च घटाने की अपील पर विपक्ष बुरी तरह भड़क गया है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मनोज कुमार झा समेत अन्य नेताओं ने इसे बीजेपी की विफलता बताया।
- भारत
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Opposition attacks PM Modi over his Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ईंधन, विदेश यात्रा से बचने, सोने की खरीद और वर्क फ्रॉम होम को लेकर जो बयान दिया, अब उस पर विपक्ष हमलावर हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे नाकामी का सबूत बताया। जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा को ही 'संकट' बता डाला।
राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर ट्वीट कर लिखा कि पीएम मोदी ने कल (10 मई 2026) जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं- ये नाकामी के सबूत हैं।
बीजेपी पर भड़के राहुल गांधी
उन्होंने आगे आरोप मढ़ते हुए कहा कि 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए और कहां न जाए। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें। उन्होंने कहा कि देश चलाना अब कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम के बस की बात नहीं है।
अखिलेश यादव ने भाजपा को बताया ‘संकट’
वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि देश के लिए संकट सिर्फ एक है जिसका नाम भाजपा है। इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था कैसे बनेगी? लगता है कि भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गई है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
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पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों आईं?- अखिलेश
उन्होंने सवाल उठाया कि सभी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आई है? बीजेपी ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं कीं वो क्या पानी से उड़ रही थीं? वो होटलों में नहीं ठहरे थे या फिर सिलेंडर की फोटो लगातर खाना बनाकर खा रहे थे? बीजेपी ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रचार क्यों नहीं किया? सभी पाबंदियां सिर्फ जनता के लिए ही है?
सपा प्रमुख ने कहा कि इस तरह की अपील से व्यापार-कारोबार और बाजारों में मंदी या महंगाई की आशंका के कारण डर, घबराहट, बेचैी और निराशा फैलेगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग कर आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, न कि भय या अफरातरफरी फैलाना। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार कर ले और देश को बर्बाद न करें। उनका कहना है कि वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया है।
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पी. चिदंबरम ने की विशेष सत्र बुलाने की मांग
वहीं कांग्रेस नेता कार्ति पी. चिदंबरम कहते हैं कि ये निर्देश मध्य-पूर्व की स्थिति से परे एक संभावित आर्थिक संकट को लेकर चिंताएं पैदा करते हैं। इस हालात में संसद का एक सदन बुलाया जाना चाहिए और बताना चाहिए कि देश किस तरह की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। मध्य पूर्व के संकट के दौरान भी किसी अन्य देश ने इस तरह की एडवाइजरी जारी नहीं की। सरकार को दिशानिर्देश देने चाहिए लेकिन वह तर्कसंगत होने चाहिए।
जब कदम उठाने थे, तब चुनाव में व्यस्त थे- आरजेडी
पीएम मोदी के बयान पर आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा की भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि इनके लोग कहते थे पैनिक मत करिए। जब आपको कदम उठाने थे, तब आप चुनाव में व्यस्त थे। अब जब आप चुनाव से निकल गाए, हजारों करोड़ चुनाव में फूंक दिए गए। देश करेगा, कोविड में भी किया। लेकिन आपकी जो जिम्मेदारी थी, आप उससे दोबारा चूक गए। प्रधानमंत्री मोदी को यह हकीकत माननी होगी।
PM मोदी की किस अपील पर घमासान?
पीएम मोदी ने 10 मई को अपने भाषण में भारतीयों से पेट्रोल और डीजल को लेकर किफायत बरतने को कहा। उन्होंने एक साल तक सोना न खरीदने और खाने में तेल कम इस्तेमाल करने का आग्रह किया। इस दौरान लोगों से विदेश यात्रा टालने की भी अपील की। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को तवज्जों देने की बात कही। इसके अलावा स्वदेशी चीजें अपनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ाने देने पर जोर दिया।