'अब वो नेतागिरी करने लगे हैं, भीड़ देख ली तो उन्हें लगा...', ओपी राजभर का हमला, CJP प्रदर्शन को लेकर क्या बोले?
ओपी राजभर ने कहा कि प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले लोगों ने जब आंदोलन में भारी भीड़ जुटते हुए देखी, तो वे छात्रों के हक की बात करने के बजाय वो नेतागिरी करने लग गए।
- भारत
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OP Rajbhar: उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में हुए प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन मूल रूप से छात्रों के पेपर लीक के गंभीर मुद्दे को लेकर शुरू किया गया था। हालांकि, अब यह आंदोलन पूरी तरह से राजनीति और 'नेतागिरी' की भेंट चढ़ चुका है।
ओपी राजभर ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले लोगों ने जब आंदोलन में भारी भीड़ जुटते हुए देखी, तो वे छात्रों के हक की बात करने के बजाय अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी करने में लग गए। उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि जैसे ही इन आयोजकों ने इसे नेतागिरी का मंच बनाया और खुद राजनीति में उतरे, वैसे ही प्रदर्शन में शामिल हुई वास्तविक भीड़ तितर-बितर हो गई और लोग अपनी-अपनी जगह वापस लौट गए।
अब वो नेतागिरी करने लगे हैं- ओपी राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने सुधांशु त्रिवेदी के तंज को लेकर कहा, 'सही कहा है। जो प्रोटेस्ट है, CJP ने छात्रों के परीक्षा लीक को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। अब वो नेतागिरी करने लगे हैं। उन्होंने भीड़ देख ली तो उन्हें लगा कि वो नेतागिरी कर लेंगे और वो जब नेतागिरी में उतरे तो भीड़ अपनी-अपनी जगह चली गई।'
कनॉट प्लेस में प्रदर्शन को लेकर क्या बोले सुधांशु त्रिवेदी?
सुधांशु त्रिवेदी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि वहां बहुत कम लोग जुटे थे। उन्होंने कनॉट प्लेस के बाहरी हिस्से को इंदिरा चौक और अंदरूनी हिस्से को राजीव चौक बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात देखकर दोनों नेताओं को शर्मिंदगी महसूस होती होगी। यह टिप्पणी प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर थी।
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सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'कांग्रेस, इंडी गठबंधन के दल और विलुप्त होते हुए वामपंथी दलों के निरंतर समाप्त होते हुए जनसमर्थन और निरंतर होते हुए नैतिक पतन से जब उन्हें अब राजनीतिक दृष्टि से सफलता की कोई संभावना नहीं दिख रही है तब हिंसक संघर्ष और षड्यंत्र के द्वारा विदेशी शक्तियों के साथ हाथ मिलाकर तख्तापलट किए जाने वाले रिजीम चेंज जैसे शब्दों का प्रयोग अब भारत की राजनीति में दिखाई पड़ रही है। उसके भी नए व्याकरणकर्ता आकर यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि यह तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। वे स्पष्ट करना चाहते हैं कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनाव के द्वारा गवर्नमेंट चेंज शब्द होता है। रिजीम चेंज शब्द वो षड्यंत्र और हिंसक संघर्ष के द्वारा तख्तापलट करने या उसके प्रयास को कहते हैं। लेकिन कनॉट प्लेस में कांग्रेस, इंडी गठबंधन, वामपंथी दलों और कुछ अन्य संगठनों के द्वारा जो तथाकथित विराट आंदोलन बनाने की घोषणा की गई थी, उसमें जो चंद मुट्ठीभर लोग आए। ऐसे में निश्चित रूप से स्वर्गीय इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का सिर शर्म से झुक गया होगा। आज क्या स्थिति हो गई कि आप चंद भर लोग भी एकत्रित नहीं कर पा रहे हैं।'
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