UP: ATS को बड़ी सफलता, लखनऊ में रेलवे सिग्नल बॉक्स को उड़ाने की साजिश रचने वाला हैंडलर शाकिब गिरफ्तार, PAK में बैठे ISI आका करते थे फंडिंग
यूपी ATS (Anti-Terrorist Squad) को दो दिन एक खुफिया सूचना मिलती है। जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए मेरठ के साकिब को तुंरत गिरफ्तार कर लिया जाता है। जिसके बाद खुलासा होता है कि, 4 लोगों का गैंग लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास एक बड़ा धमाका करने की प्लानिंग कर रहा था। साथ ही ट्रेन एक्सीडेंट करवाने की भी सजिश थी। पढ़ें पूरी खबर।
- भारत
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राघवेंद्र पांडे की रिपोर्ट
यूपी ATS (Anti-Terrorist Squad) को बड़ी कामयाबी मिली है। दरअसल, मेरठ का रहने वाला साकिब उफ्र डेविल का सीधे सीधे से ISI हैंडलर से संपर्क था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि साकिब लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल बॉक्स को उड़ाने वाला था और साकिब को पाकिस्तान में बैठ ISI हैंडलर फंडिंग करता था, जिसके बाद साकिब अपने गैंग के बाकी 3 सदस्यों को पैसे देता था।
ये गैंग लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल बॉक्स को नुकसान पहुंचाकर ट्रेन ट्रैफिक बाधित करने और संभावित एक्सीडेंट कराने की साजिश रच रहा था। लेकिन वक्त रहते ATS को इसकी खुफिया जानकारी मिली और इन चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार लोगों में साकिब उर्फ डेविल (25 वर्ष), मेरठ के अगवानपुर का रहने वाला अरबाब (20 वर्ष), मेरठ का विकास गहलावत उर्फ रौनक (27 वर्ष), गौतम बुद्ध नगर का लोकेश उर्फ पपला पंडित (19 वर्ष) का नाम शामिल है।
कैसे हुआ साजिश का खुलासा?
ATS के मुताबिक, साकिब उर्फ डेविल इस गिरोह का मुख्य सदस्य था। वह पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर के सीधे संपर्क में था। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने लखनऊ, गाजियाबाद और मेरठ समेत कई जगहों पर बड़े प्रतिष्ठानों, गाड़ियों के शोरूम और गैस सिलेंडर भरे ट्रकों की रेकी की थी। उन्होंने Google लोकेशन की स्क्रीन रिकॉर्डिंग और फोटो-वीडियो भी पाकिस्तानी हैंडलर को भेजे थे।
योजना थी कि सिग्नल बॉक्स को जलाकर या विस्फोट कर ट्रेनों की आवाजाही बाधित की जाए, जिससे बड़ा रेल हादसा हो सके। साथ ही गैस सिलेंडर ट्रकों और शोरूम में आगजनी कर आर्थिक नुकसान और अफरा-तफरी फैलाने का प्लान भी था। हैंडलर आरोपियों को ओसामा बिन लादेन, गजवा-ए-हिंद जैसे नामों से उकसा रहा था।
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ISI ने साकिब से कैसे किया संपर्क?
साकिब के सोशल मीडिया पर असलहों (हथियारों) वाले वीडियो देखकर लोकेश और विकास उसके संपर्क में आए। अरबाब पहले से पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़ा हुआ था। फंडिंग साकिब के जरिए बाकी सदस्यों तक पहुंचती थी।
डिजिटल सबूतों और फोन की जांच होगी
गनीमत रही की यूपी एटीएस ने 2 अप्रैल को ही इन लोगों के प्लान का पता लगा लिया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने इस सफलता की पुष्टि की। एटीएस ने स्पेशल कोर्ट से एक हफ्ते की रिमांड मांगी है, आज सुनवाई होनी है। सभी आरोपियों को NIA/ATS कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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एटीएस अब डिजिटल सबूतों, मोबाइल फोन और बाकी सामग्री की जांच कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान से निर्देशित था और देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा था। यह घटना रेलवे सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की सतर्कता का उदाहरण है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या एटीएस को दें।