Cyber Fraud: लखनऊ की समिट बिल्डिंग में चल रहे फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 119 लोग गिरफ्तार; ऐसे हुआ खुलासा

लखनऊ पुलिस ने समिट बिल्डिंग में चल रहे एक बड़े फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। मामले में 119 लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें से 40 नॉर्थ-ईस्ट लड़कियां भी शामिल है, जानें पुलिस ने कैसे किया खुलासा, पूरी डिटेल पढ़ें

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लखनऊ पुलिस कमिश्नरेटन ने इंटरनेशनल साइबर ठगी के मामले में बड़ा खुलासा किया
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेटन ने इंटरनेशनल साइबर ठगी के मामले में बड़ा खुलासा किया | Image: Republic

Lucknow cyber fraud bust: लखनऊ पुलिस ने  गोमतीनगर की समिट बिल्डिंग में चल रहे एक बड़े फर्जी अंरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड किया है। पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने 15 दिनों की निगरानी के बाद ये बड़ी कार्रवाई की। इस ऑपरेशन में 119 लोगों को हिरासत में लिया गया, इनमें नॉर्थ-ईस्ट राज्यों की करीब 40 लड़कियां भी शामिल हैं। पुलिस ने मौके से 100 लैपटॉप, 178 कॉलिंग मोबाइल फोन, कई डिजिटल मशीनें और कई दस्तावेज बरामद किए हैं।  

कॉल सेंटर कैसे चल रहा था?

कॉल सेंटर का नाम 'सोलारिस सॉल्यूशन' था। बाहर से देखने में ये एकदम नॉर्मल लगता था, लेकिन अंदर लैविश सेटअप था। यहां विदेशी लोगों, खासकर अमेरिका के बुजुर्गों को निशाना बनाया जाता था। कर्मचारी खुद को बैंक अधिकारी या टेक सपोर्ट एक्जीक्यूटिव बताते थे। वे रिफंड देने या बैंक अकाउंट में समस्या ठीक करने का झांसा देते। पीड़ित को फोन पर गाइड करके OTP निकलवाते और पैसे ट्रांसफर करवा लेते। कुछ मामलों में गिफ्ट कार्ड, डिजिटल कूपन या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भी ठगी होती थी। मुख्य रूप से रात 7 बजे से सुबह 3 बजे तक कॉल्स चलती थीं। एक 'डॉलर ऐप' नाम के ऐप का इस्तेमाल भी किया जाता था।

भर्ती कैसे होती थी और कितनी सैलरी?

यहां जॉब के लिए 5 राउंड इंटरव्यू लेने पड़ते थे। नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियों को खास तौर पर चुना जाता क्योंकि उनकी अंग्रेजी अच्छी और एक्सेंट न्यूट्रल होती थी। विदेशी लोगों से बात करने के लिए 2.5 महीने की खास ट्रेनिंग भी दी जाती थी। सैलरी 25 से 40 हजार रुपये महीना थी। लेकिन असली कमाई ठगी पर 10% कमीशन से होती थी। कई कर्मचारी महीने में 80 हजार से 2 लाख रुपये तक कमा लेते थे। बिल्डिंग का किराया और सारे खर्च मिलाकर सालाना करीब 3 करोड़ रुपये बैठते थे।

पुलिस ने कैसे पकड़ा?

पुलिस को टिप मिली थी कि यह कोई असली कॉल सेंटर नहीं, बल्कि साइबर ठगी का अड्डा है। विदेशी पीड़ितों की शिकायतों के बाद 15 दिन निगरानी की गई। बुधवार को छापा मारा गया। एडीसीपी क्राइम किरण यादव की अगुवाई में पूरी टीम ने एक्शन लिया।

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पुलिस नेटवर्क के बाकी सदस्यों, मनी ट्रेल और विदेशी कनेक्शन का पता लगा रही है। दो ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार (दोनों अहमदाबाद के रहने वाले) भी हिरासत में हैं। ऐसे मामलों में युवाओं को अच्छी सैलरी और कमीशन का लालच देकर फंसाया जाता है। जागरूक रहना बहुत जरूरी है। अगर कोई अजीब कॉल आए या पैसे मांगें तो तुरंत पुलिस को बताएं। लखनऊ पुलिस की ये कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।  

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Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड