NDRF की 36 सदस्यीय टीम, 100 गोताखोर और 35 चौकियां...कानपुर में उफान पर गंगा नदी, 176 गांवों में बाढ़ का अलर्ट; बचाव दल तैनात

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। लगातार गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
Ganga river 1 m below warning mark Kanpur officials step up ghat inspections ndrf stand by
NDRF की 36 सदस्यीय टीम, 100 गोताखोर और 35 चौकियां...कानपुर में उफान पर गंगा नदी, 176 गांवों में बाढ़ का अलर्ट; बचाव दल तैनात | Image: Republic

गौरव त्रिवेदी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। लगातार गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस बीच प्रशासन ने कानपुर के बाढ़ संभावित इलाकों के करीब 176 गांवों को बुधवार को सतर्क कर दिया गया। पुलिस और जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने के साथ बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर करीब 35 चौकियां स्थापित की गई हैं।

आपको बता दें कि गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कानपुर में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। 19 अगस्त सुबह 8 बजे के आंकड़ों के मुताबिक कानपुर बैराज पर अपस्ट्रीम जलस्तर 113.570 मीटर और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 113.420 मीटर दर्ज किया गया। वहीं बैराज से करीब 2 लाख 91 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। हालांकि अभी जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे है, लेकिन प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

कानपुर बैराज का चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर निर्धारित है। वहीं शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.180 मीटर दर्ज किया गया है, जहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। हरिद्वार बैराज से 1 लाख 18 हजार 622 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1 लाख 15 हजार 137 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के चलते नदी किनारे के इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

निचले इलाकों में विशेष निगरानी

Advertisement

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि गंगा नदी के किनारे और निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जबकि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए घाटों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। पिछली घटनाओं को देखते हुए नदी तट को साफ करा दिया गया है, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को निर्धारित आश्रय स्थलों में जाने की सलाह दी गई है। पुलिस लोगों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को उफनती नदी में उतरने से रोकने के लिए भी कड़ी निगरानी रख रही है।

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के समन्वय से आपातकालीन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक संसाधन तैयार रखे गए हैं।

Advertisement

बचाव दल तैनात

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर करीब 35 चौकियां स्थापित की गई हैं। लाल ने बताया कि 36 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम, एक पूर्ण बाढ़ राहत दल, करीब 100 प्रशिक्षित आपदा राहत गोताखोरों तथा होम गार्ड, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) और नागरिक पुलिस के जवानों को बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया है।

इसे भी पढ़ें- CCTV बंद, सबूत डिलीट...पत्नी ने पहले की पति की हत्या फिर गला दबाकर चार साल के बेटे को भी मार डाला, प्रेमी संग मिलकर रात भर खेला खूनी खेल

Published By:
 Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड