अपडेटेड 26 January 2026 at 16:11 IST

UGC के नियम और शंकराचार्य विवाद से नाराज बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा, सियासी गलियारों में हड़कंप

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार के विरोध में इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सवर्ण समाज के अधिकारों और संतों की गरिमा की रक्षा के लिए यह कदम उठाया।

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Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri resigns in protest against new UGC rules
UGC के विरोध में बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा | Image: X

UP NEWS : देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद का विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, UGC द्वारा लागू किए गए नए नियमों को वे जनरल कैटेगरी (सवर्ण समाज) के छात्रों के अधिकारों और हितों के खिलाफ मानते हैं। दूसरा, प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार, जिसमें शिखा खींचने का आरोप भी शामिल है। इन दोनों घटनाओं से उन्हें गहरी आपत्ति है। उनका कहना है कि ये दोनों मुद्दे समाज के एक बड़े वर्ग की गरिमा, अधिकारों और सम्मान से जुड़े हैं और ऐसे हालात में वे प्रशासनिक सेवा में बने रहना उचित नहीं समझते।

अलंकार अग्निहोत्री ने क्यों दिया इस्तीफा?

अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के PCS अधिकारी हैं, उन्होंने अपने करीब 5 पेज के त्यागपत्र में लिखा है कि UGC के नए नियम जनरल कैटेगरी छात्रों के अधिकारों और गरिमा के खिलाफ हैं। प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार ने उन्हें गहराई से आहत किया, जिसे वे ब्राह्मण समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक अस्मिता पर हमला मानते हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर ब्राह्मण-विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ये घटनाएं समाज में विभाजन बढ़ा रही हैं और वे ऐसी व्यवस्था में सेवा नहीं दे सकते।

UGC के नए नियम क्या हैं?

UGC ने हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए अनिवार्य निर्देश जारी किए हैं। इनमें Equal Opportunity Centre, Equity Committee, 24x7 हेल्पलाइन और Equity Squads का गठन शामिल है। आयोग का उद्देश्य SC/ST/OBC छात्रों के खिलाफ भेदभाव पर निगरानी रखना और शिकायतों का त्वरित निपटारा करना है। यदि कोई संस्थान इनका पालन नहीं करता, तो मान्यता रद्द या फंडिंग रोकी जा सकती है। UGC के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच ऐसी शिकायतों में 100% से अधिक वृद्धि हुई है।

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जनरल कैटेगरी का विरोध क्यों?

कई छात्र संगठन और जनरल कैटेगरी के लोग इसे एकतरफा और SC/ST एक्ट जैसा बता रहे हैं। छात्रों और संगठनों का आरोप है कि ये नियम एकतरफा हैं। उनका कहना है कि Equity Committees में जनरल कैटेगरी के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य नहीं किया गया और झूठी शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान हटा दिया गया है। इससे छात्रों को डर है कि बिना ठोस सबूत के आरोप लगाए जा सकते हैं, जिसका असर उनके करियर पर पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर #UGCBlackLaw जैसे ट्रेंड चल रहे हैं, जहां इसे काला कानून कहा जा रहा है।

शंकराचार्य विवाद

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर को लेकर प्रशासन के साथ विवाद चल रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया है कि उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और शिविर पर हमले की कोशिश हुई। उन्होंने माफी की मांग की है और कहा है कि जब तक माफी नहीं मिलेगी, वे संगम स्नान नहीं करेंगे। इस मामले में विपक्ष ने यूपी सरकार पर हमला बोला है, जबकि डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा है कि सरकार संत समाज का सम्मान करती है और टकराव से बचना चाहती है।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 26 January 2026 at 16:11 IST